
ज्योति जैन /उदयपुर- सीने में जूनून और आँखों में देशभक्ति की चमक रखते है, दुश्मन की सांसे थम जायें, आवाज में इतनी धमक रखते है। देश के लिए अपनी जान तक न्यौछावर करने का जज्बा रखने वाले देश के इन रक्षकों पर कभी नक्सली तो कभी आतंकवादी मौत की गोलियां बरसा रहे हैं।
सुकमा के किस्टाराम क्षेत्र के पलोड़ी में नक्सलियों द्वारा आइइडी ब्लास्ट कर बारुदी सुरंगरोधी वाहन को उड़ा दिया गया। पूरा देश स्तब्ध, देश के 9 जवान शहीद, 2 गंभीर घायल, सभी तरफ शोक की लहर। सिर्फ बाहरी ही नहीं भीतरी हामलों से भी जूझ रहे हैं देश के सैनिक।
लेकिन नफरत के बारूद में इतनी ताकत ही नहीं कि देश के वीरों के मन देशप्रेम की भावना को जरा भी डिगा सकें। अभी हाल ही में भारतीय सेना को 255 अफसर मिले हैं इनमें उदयपुर के दो लाडलों ने भी लेफ्टिनेंट का पद अपने नाम किया है। उदयपुर के शुभम जैन और विशाल जैन को चैन्नई में हुए पासिंग आउट सेरेमनी में लेफ्टिनेंट का पदभार दिया गया अब जल्द ही इन्हें देश की सेवा हेतु भेजा जाएगा। ट्रेनिंग से लौटे शुभम और विशाल से हुई पत्रिका की विशेष बातचीत के कुछ अंश-
शुभम जैन- हारना कभी सीखा ही नहीं, देशसेवा का जज्बा बचपन से मन में था और हमेशा कायम रहेगा।
उदयपुर- बचपन से ही देश के लिए कुछ करने की ख्वाहिश थी। स्कूल के दौरान एनसीसी जॉइन की तभी लगा कि यहीं रास्ता मुझे मेरी मंजिल तक लेकर जाएगा। ये कहना है भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने उदयपुर के शुभम जैन ।
स्कूल के बाद एमबीए करने के दौरान ही एसएसबी की परीक्षा दी। इसमें चयन और कठिन ट्रेनिंग के बाद लेफ़्टिनेन्ट बने और अब देश की सेवा हेतु तत्पर है। उनका कहना है कि यहां तक पहुंचने में माता-पिता और भाई कुशांक ने बहुत साथ दिया।
मूलत: टाड़गढ़ [अजमेर] निवासी शुभम के पिता कैलाश जैन और माता संगीता जैन का कहना है कि एक माता-पिता होने के नाते अपने बेटे पर हमें गर्व होता है। अब तक परिवार से कोई भी आर्मी में नहीं है, देश की सेवा से बड़ा कुछ भी नहीं, बचपन से उसका सपना था कि देश के लिए कुछ करना है, अब जब वो सपना साकार हो रहा है तो बहुत खुशी हो रही है।
संदेश- सेना में जाने के इच्छुक सभी नौजवानों से उनका कहना है कि अपनी हार से मत डरिये, जब-जब हार से आपका सामना हो दुगनी हिम्मत से उठिए, मेहनत और लगन से सब कुछ मुमकिन है।
विशाल जैन- कुछ ऐसा करना था जो सबसे अलग हो।
उदयपुर- विशाल जैन का कहना है कि वे शुरू से ऐसा कुछ करना चाहते थे जो सबसे अलग हो। ऐसे में बीटेक कर लेने के बाद उन्होंने एसएसबी की परीक्षा दी और 11 महीनों की ट्रेनिंग के बाद लेफ्टिनेंट का ताज अपने सिर पर सजाया।
पहले प्रयास में ही उन्होंने एसएसबी की परीक्षा पास कर ली थी। उनका कहना है कि ट्रेनिंग काफी मुश्किल थी, इसमें शारीरिक से ज्यादा मानसिक मजबूती बनाए रखना बेहद जरुरी होता है। विशाल के पिता जे.के.जैन और माता पुष्पा जैन का कहना है कि जब बेटे ने उन्हें अपने लक्ष्य के बारे में बताया तो उन्हें बेहद खुशी हुई।
परिवार से अब तक कोई आर्मी में नहीं है ऐसे में विशाल की देशभक्ति की इस राह से पूरा परिवार बेहद खुश है।
Updated on:
15 Mar 2018 05:28 pm
Published on:
15 Mar 2018 04:04 pm
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