प्रक्रिया ऑनलाइन हुई, लेकिन दुरस्त गांवों में पेंशनर अनजान, पेंशन अटकी तो अपनों के सहारे पहुंच रहे कोष कार्यालय
सरकारी पेंशन पाकर गुजारा चला रहे पेंशनर या उनके आश्रितों को जीवित प्रमाण पत्र देना जरुरी है। इस साल में जून तक सभी को प्रमाण पत्र देना था, लेकिन जिले में 4 हजार से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जिन्होंने खुद के जीवित होने का प्रमाण नहीं दिया। लिहाजा उनकी पेंशन अटक गई है। खाते में राशि जमा नहीं होने की स्थिति में वे कोष कार्यालय पहुंच रहे हैं।वित्तीय वर्ष 2022-23 पूरा होने तक 6 हजार से ज्यादा पेंशनर्स ने जीवित प्रमाण पत्र नहीं दिया था। ऐसे में जून से उनकी रोक दी गई। प्रमाण पत्र देने का समय बढ़ाते हुए जून अंत तक रखा गया था, जिसमें करीब दो हजार पेंशनर ने प्रमाण पत्र दिया, जबकि 4 हजार अब भी नहीं दे पाए हैं।
पेंशन विभाग के पोर्टल पर पेंशनर्स के फॉर्म-16 अपलोड किए है। संभाग के सभी पेंशनर्स को वेबसाइट पेंशन डॉट राजस्थान डॉट जीओवी डॉट इन से फॉर्म-16 डाउनलोड करने के लिए भी कहा गया। जून की पेंशन भुगतान के लिए बिल बनने की प्रक्रिया से पहले जीवित प्रमाण पत्र मांगे गए थे।
यह है स्थिति
28 हजार कुल पेंशनर जिलेभर में
02 हजार फैमेली पेंशनर शामिल
04 हजार पेंशन की पेंशन रुकी
02 सौ रोजाना पहुंच रहे दफ्तर
इनका कहनाजीवित प्रमाण पत्र देने वालों की पेंशन जारी रही, जबकि नहीं देने वालों की रुक गई। पेंशनर समाज के कार्यालय जिला स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक है, जहां से मदद ली जा सकती है। कार्यालय तक नहीं पहुंच पाने की स्थिति में नजदीकी इ-मित्र से प्रमाण पत्र दिया जा सकता है।
भंवर सेठ, अध्यक्ष, पेंशनर समाज