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गुड़गांव में की 4 साल नौकरी, जाम को देखकर उदयपुर के युवा को आया आइडिया, अब इस नवाचार से बदल सकती है आपातकालीन सेवाओं की तस्वीर

उदयपुर के युवा इनोवेटर दीपक रमाकान्ता सेन ने ड्रोन तकनीक का उपयोग कर आपातकालीन सेवाओं में सुधार करने की दिशा में काम शुरू किया है। गुड़गांव में 2018-2022 तक नौकरी करते हुए, ट्रैफिक जाम से जूझती एम्बुलेंस को देखकर उन्हें इस तकनीक पर काम करने की प्रेरणा मिली।

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drone based medical supply services

AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर और इनसेट में दीपक रमाकान्ता सेन की फोटो: पत्रिका

Drone Based Medical Supply Services: जब देश के महानगर ट्रैफिक जाम से जूझ रहे हैं, समय पर मदद न पहुंच पाने से जिंदगियां जोखिम में पड़ जाती हैं, तब समाधान की तलाश जमीन से ऊपर उठकर आसमान तक पहुंच रही है।

उदयपुर के युवा इनोवेटर दीपक रमाकान्ता सेन ऐसी हवाई ड्रोन तकनीक पर काम कर रहे हैं, जो आपातकालीन सेवाओं की तस्वीर बदल सकती है। दीपक का सफर सड़क पर फंसी एम्बुलेंस को देखकर शुरू हुआ। गुड़गांव में 2018 से 2022 तक नौकरी के दौरान रोज जाम ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया।

जमीन से जुड़ा इनोवेशन

दीपक का फोकस देश की भौगोलिक और सामाजिक वास्तविकताओं पर रहा। उन्होंने ड्रोन आधारित कार्गो डिलीवरी सिस्टम पर काम शुरू किया। लक्षदीप एविएशन कंपनी बनाकर उन्नत एरियल टेक्नोलॉजी से परिवहन और लॉजिस्टिक्स आवश्यकता पूरा करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

तकनीकी शिक्षा से इनोवेशन तक

दीपक ने कंप्यूटर एप्लीकेशन में उच्च शिक्षा प्राप्त कर तकनीक की मजबूत समझ विकसित की। टेक्नोलॉजी उनके लिए नौकरी नहीं, बल्कि बदलाव का माध्यम बन गई। कॉर्पोरेट जीवन के साथ-साथ दीपक ने वैश्विक स्तर पर उभरती ड्रोन और एरियल मोबिलिटी टेक्नोलॉजी पर गहन अध्ययन शुरू किया।

उन्होंने देखा कि कई देश ड्रोन का उपयोग मेडिकल सप्लाई, आपदा राहत, दुर्गम क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स और शहरी परिवहन के लिए कर रहे हैं। इसी रिसर्च ने उन्हें विश्वास दिलाया कि यह तकनीक बेहद कारगर हो सकती है। इससे कार्गो डिलीवरी और भविष्य की एयर एम्बुलेंस सेवाओं की व्यवहारिकता को परखा जा सकेगा।

डिजाइन और सिमुलेशन पूरा, मॉडल निर्माण की तैयारी

कार्गो ड्रोन का डिजाइन और तकनीकी सिमुलेशन कार्य पूरा कर लिया है। एरोडायनामिक स्ट्रक्चर, पेलोड क्षमता, उड़ान स्थिरता और सेफ्टी पैरामीटर्स को ध्यान में रखते हुए वर्चुअल टेस्टिंग सफलतापूर्वक कर चुके हैं।

अब अगला चरण फिजिकल मॉडल और प्रोटोटाइप निर्माण का है, जिस पर जल्द काम शुरू होगा। यह मॉडल वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण के लिए तैयार किया जाएगा।

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