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सड़क से हटकर नजर स्क्रीन पर, बढ़ गया दुर्घटना का जोखिम

जीपीएस के दौर में ड्राइविंग आसान, लेकिन स्क्रीन निर्भरता बढ़ा रही खतरा उदयपुर. शहर में अब ड्राइविंग पहले से बहुत आसान हो गई है। स्मार्टफोन और कार के नेविगेशन ऐप्स की मदद से चालक बिना नक्शा देखे ही अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं। स्क्रीन पर दिख रहे निर्देशों को देखकर ही सही मोड़, चौराहा और […]

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अधिकतर ड्राइवर सड़क पर नजर कम रखते हुए स्क्रीन पर ध्यान दे रहे हैं। इसका असर यह हुआ कि सड़क पर दुर्घटना का जोखिम बढ़ गया है।

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जीपीएस के दौर में ड्राइविंग आसान, लेकिन स्क्रीन निर्भरता बढ़ा रही खतरा

उदयपुर. शहर में अब ड्राइविंग पहले से बहुत आसान हो गई है। स्मार्टफोन और कार के नेविगेशन ऐप्स की मदद से चालक बिना नक्शा देखे ही अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं। स्क्रीन पर दिख रहे निर्देशों को देखकर ही सही मोड़, चौराहा और रास्ता पहचानना आम हो गया है। लेकिन इस सुविधा के साथ एक नया खतरा भी सामने आया है। अधिकतर ड्राइवर सड़क पर नजर कम रखते हुए स्क्रीन पर ध्यान दे रहे हैं। इसका असर यह हुआ कि सड़क पर दुर्घटना का जोखिम बढ़ गया है।

डिजिटल सुविधा के फायदे

शहर में सड़क पर ड्राइविंग करने वाले अधिकतर लोग अब मोबाइल ऐप्स पर भरोसा कर रहे हैं। ऐप्स न केवल दूरी और समय का अनुमान बताते हैं, बल्कि ट्रैफिक, सड़कों की मरम्मत, और यहां तक कि रूट पर चल रहे जाम की जानकारी भी देते हैं। डिजिटल नेविगेशन की यह सुविधा खासकर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो शहर में नए हैं या ऐसे रास्तों से गुजरते हैं जो उन्हें नहीं पता।

-सटीक समय अनुमान: ऐप्स बताते हैं कि यात्रा कितने समय में पूरी होगी।-ट्रैफिक अपडेट: रीयल-टाइम ट्रैफिक रिपोर्ट से ड्राइवर समय बचा सकते हैं।

-सुरक्षा संकेत: कई ऐप्स खतरनाक मोड़ या तेज वाहन वाले क्षेत्रों पर चेतावनी देते हैं।

बढ़ती स्क्रीन निर्भरता

लेकिन यह सुविधा ही अब नए सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार स्क्रीन पर नजर रखने की आदत से ड्राइवरों का ध्यान सड़क से हट रहा है।

"जीपीएस पर बहुत अधिक निर्भरता के कारण चालक कई बार सड़क के नियम भूल जाते हैं," बताते हैं ट्रैफिक इंजीनियर डॉ. अमित वर्मा। उनका कहना है कि छोटे मोड़, पैदल यात्री, और अचानक आने वाली गाड़ियाँ ऐसे समय में दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।

गलत रूट का जोखिम

हालांकि ऐप्स आम तौर पर सही मार्ग सुझाते हैं, लेकिन कई बार गलत दिशा निर्देश भी सामने आते हैं। उदयपुर में एक मामला सामने आया, जिसमें चालक ने ऐप के गलत निर्देश मान लिए और संकरी गली में फंस गया। इससे न केवल वाहन को नुकसान हुआ, बल्कि ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ।

"टेक्नोलॉजी भरोसेमंद है, लेकिन हमेशा नहीं। ड्राइवर की जिम्मेदारी बनी रहनी चाहिए," कहते हैं यातायात पुलिस अधिकारी इंस्पेक्टर राजेश चौहान।----

सुविधा और खतरे का संतुलन

परिवहन विशेषज्ञ राहुल जैन का मानना है जीपीएस ने ड्राइविंग आसान की है, लेकिन सुरक्षा नियमों का पालन करना अब पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। यह नियम जरुर अपनाने चाइये।

- स्क्रीन पर ज्यादा ध्यान न दें, सड़क पर नजर बनाए रखें।- रूट बदलते समय रुककर निर्देश देखें, चलते-चलते ऐप न देखें।

- ट्रैफिक और पैदल यात्रियों पर हमेशा नजर रखें।

टेक्नोलॉजी के साथ जागरूकता भी जरूरी ड्राइविंग के दौरान ऐप्स का सही इस्तेमाल और सड़क नियमों का पालन ही सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं और नए ड्राइवरों के लिए डिजिटल नेविगेशन का प्रशिक्षण और सावधानी जरूरी है। उदयपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में जहां ट्रैफिक और सड़कें लगातार बदल रही हैं, डिजिटल नेविगेशन ने सुविधा दी है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी आई है। स्क्रीन पर नजर रखते हुए, सड़क पर सतर्क रहना अब किसी विकल्प की तरह नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन गया है।