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राजस्थान की सुप्रसिद्ध मांड गायिका मांगीबाई आर्य का निधन, संगीत जगत ने खोया अनमोल रतन

मांड गायिका मांगी बाई आर्य का गुरुवार सुबह उदयपुर में हृदयाघात से निधन हो गया
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उदयपुर

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rajdeep sharma

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Updated: 23 Nov 2017, 7:04 PM IST

mangi bai arya

उदयपुर . राजस्थान की सुप्रसिद्ध मांडगायिका मांगी बाई आर्य का गुरुवार सुबह हृदयाघात से निधन हो गया। वे 88 वर्ष की थीं। वे अपने पीछे चार पुत्र गिरधारी आर्य, मदन आर्य, माणिक आर्य व ओमप्रकाश आर्य सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गईं हैं।

प्रतापगढ़ के कमलाराम एवं मोहनबाई के यहां जन्मी मांगी बाई आर्य को गायकी विरासत में मिली। उनके पिताजी कमलाराम शास्त्रीय संगीत के मशहूर कलाकार थे। लोक संगीत की मशहूर विधा मांड गायकी को देश-विदेश तक पहुंचाने में मांगी बाई आर्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्हाेेंने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में राजस्थानी लोक गीतों की अपने मधुर स्वर से अनूठी पहचान दी। उदयपुर में किसी भी विशेष अतिथि के आगमन पर ‘केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश‘ के सुमधुर कंठ से बरबस ही सभी को आकर्षित करने वाली मांगी बाई आर्य को आकाशवाणी महानिदेशालय (भारत सरकार के ‘ए‘ गेड कलाकार का दर्जा प्रदान किया।

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ये मिले पुरस्कार

मांगीबाई आर्य को 1982 में महाराणा कुंभा संगीत परिषद पुरस्कार, 1984 में मुम्बई के सिद्धार्थ मेमोरियल ट्रस्ट, 1987 में बीएन नोबल्स महाविद्यालय प्रबंध समिति 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के हाथों राज्य स्तर पर, 2003 में मरूधरा संस्था कोलकाता, 2006 में राजस्थानी भाषा सहित्य अकादमी बीकानेर , 2007 में राज्यपाल के हाथों राज्य स्तरीय पुरस्कार, 2008 में राजस्थान संगीत नाटक अकादमी जोधपुर , 2008 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील द्वारा केन्द्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2010 में मध्यप्रदेश सरकार तथा 2011 में राजस्थान रत्नाकर (नई दिल्ली) सहित हिन्दुस्तान जिंक, जे.के सिन्थेटिक्स, डीसीएम, भारतेंदु साहित्य समिति, छत्रपति शिवाजी महोत्सव, महाभारत व कुरूक्षेत्र आदि उत्सवों के मौके पर भी सम्मान मिले। कई सीरियल व एलबम में भी आर्य की आवाज बुलंद हुई। 20 वर्ष तक उन्होंने पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर को लोकगायन शिक्षिका के बतौर सेवाएं दी। उनके इस योगदान को नहीं भुलाया जा सकेगा।