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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से प्राचीन है राणेरा का महादेव मंदिर , जेम्स टॉड ने भी इस मन्दिर की पौराणिकता को लेकर जताया था आश्चर्य

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से प्राचीन है राणेरा का महादेव मंदिर , जेम्स टॉड ने भी इस मन्दिर की पौराणिकता को लेकर जताया था आश्चर्य

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ranera mahadev temple

महाशिवरात्रि को लेकर किया ट्रैफिक डायवर्जन, मावली में देर रात्रि से लगा कई किलोमीटर लंबा जाम

उमेश मेनारिया/ मेनार. राणेरा की पाल नान्दोली खुर्द स्थित महादेव मंदिर जो मेवाड़ के सबसे प्राचीन मंदिरों में शुमार है। ये सतयुग के राजा मान्धाता का जन्म स्थान है । सदियोंं पुराना ये प्राचीन मंदिर मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से भी पहले का है । शिव के पवित्र धार्मिक स्थल और केंद्र हैं वह स्वयंभू के रूप में जाने जाते हैं जिसका अर्थ है स्वयं उत्पन्न ऐसा ही एक शिव धाम है जो स्थित है उदयपुुर जिले के ढूंढिया नान्दोली खुर्द में राणेरा की पाल पर है । यह शिव मंदिर सदियों पुराना है ।

राजा मान्धाता ने करवाया था निर्माण

राणेरा पाल स्थित शिव मंदिर का निर्माण राजा मान्धाता ने करवाया था । राजा मान्धाता ने सौ अश्वमेध और सौ राजसूय यज्ञ करके दस योजन लंबे और एक योजन ऊंचे रोहित नामक सोने के मत्स्य बनवाकर ब्राह्मणों को दान दिये थे। राणेरा यज्ञ के बाद यज्ञोंं में से राजा ने एक यज्ञ मेवाड़ की पावन धरा पर भी किया था । मांधाता ने रनर नमक एक सुन्दर सरोवर बनाया तथा सरोवर की पूर्व दिशा में भगवान शिव का मन्दिर बनवाया । रनर सरोवर को आज राणेरा नाम से जाना है । मंदिर के सामने स्थित तालाब में औसत 7 - 8 महीने पानी भरा रहता है । यज्ञ अनुष्ठान के लिए राजा मान्धाता ने कई ऋषि मुनियों को आमंत्रित किया था इस यज्ञ में तपस्थली मेनार से कोक्लेश्वर तथा केदारेश्वर ऋषि दोनों भाइयोंं ने भी भाग लिया था ।

इनका कहना है

यह मंदिर बहुत प्राचीन है ।वहींं सेकड़ोंं गांंवोंं की आस्था का मुख्य केंद्र है । मंदिर मण्डल समिति द्वारा हर वर्ष मेले का आयोजन करवाया जाता है । वही विविध अनुष्ठान आयोजीत होते है ।

विष्णु प्रसाद लौहार, अध्यक्ष नीलकंठ महादेव मन्दिर मण्डल समिति

इसकी पौराणिकता पर जेम्स टॉड ने जताया था आश्चर्य

जुगनू ढूंढिया के राणेरा की पाल पर विराजित शिव स्वयंभूू है । मंदिर के यहांं बनी राणेरा की पाल मांधाता द्वारा कृत है । ये शिव मंदिर मालवा के ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से भी प्राचीन है। ये सतयुग के राजा मांधाता का जन्मस्थान है । यहां राजा मांधाता द्वारा 7 विशाल कुंड बनाकर 7 समुद्रों का आह्वाहन किया गया था । राणेरा से मेनार वाली भूमि मान्धाता का दत्त कहा जाता है ।

डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू मेवाड़ इतिहास के लेखक , इतिहासकार