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दो दशक में महाराणा प्रताप के स्मृति स्थलों को नहीं दिला पाए पहचान, अब प्रताप सर्किट बनेगा तो बढ़ेगा गौरव …

सालों से चली आ रही मेवाड़ कॉम्पलेक्स योजना में करोड़ों रुपए हुए खर्च, फिर भी प्रताप के स्थलों की नहीं हो पाई उचित सार-संभाल, राजसमंद सांसद रहने के दौरान दिया कुमारी ने उठाई थी प्रताप सर्किट की मांग

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महाराणा प्रताप पूरी दुनिया में अपनी वीरता और अदम्य साहस के लिए जाने जाते हैं, लेकिन प्रताप की शौर्य गाथा लिखने व कहने वाले स्थलों को इतना गौरव नहीं मिल पाया, जितना मिलना चाहिए थे। समय के साथ इसके लिए योजनाएं जरूर चलाई गई, लेकिन योजनाओं की ढीली चाल से महाराणा प्रताप के स्थल आज भी उनके शौर्य को सम्मान नहीं दिला पाए हैं। उनके कई ऐसे स्मृति स्थल हैं, जिन्हें जीर्णोद्धार की जरूरत है। ये स्थल पर्यटकों की पहुंच से भी दूर हैं। अब जब राज्य के अंतरिम बजट में महाराणा प्रताप सर्किट के लिए उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है तो उम्मीद की जा रही है कि अब प्रताप के स्थलों के साथ न्याय हो सकेगा।

सांसद की पहल पर बनी थी योजना

राजसमंद की तत्कालीन सांसद दिया कुमारी ने केन्द्रीय व राज्य के पर्यटन मंत्री का ध्यान प्रताप सर्किट बनाने की ओर आकर्षित किया था। इस पर केन्द्रीय पर्यटन मंत्री ने सांसद को 14 अगस्त, 2019 को परियोजना के प्रस्ताव भिजवाने को कहा था। इस कड़ी में राज्य के पर्यटन निदेशालय की ओर से प्रस्ताव मांगे जाने पर क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय ने प्रस्ताव बनाकर भिजवाए थे।

सर्किट में इन जगहों को किया गया है शामिल

वित्त मंत्री दिया कुमारी ने महाराणा प्रताप सर्किट की घोषणा की, जिसमें इनसे जुड़े कई मुख्य स्थलों को शामिल किया गया है। जिसमें गोगुंदा, चावंड, कुंभलगढ़, दिवेर, हल्दीघाटी और उदयपुर शामिल हैं।

मेवाड़ कॉम्पलेक्स योजना में कार्य हुए, लेकिन देखरेख व संरक्षण का रहा अभाव

मेवाड़ कॉम्पलेक्स योजना के तहत प्रताप से जुड़े स्थलों पर पिछले दो दशक में कई काम हुए हैं। इसके तहत कुंभलगढ़ समेत गोगुंदा, चावंड, दिवेर आदि स्थलों पर कार्य हुए, लेकिन इनके देखरेख के अभाव में ये स्थल आज भी बेकद्री का शिकार हैं।

मेवाड़ कॉम्पलेक्स योजना फेज 1 - स्वीकृत वर्ष - 2005-06

स्वीकृत राशि - 675.00 लाख रुपएराज्य सरकार की मेवाड़ कॉम्पलेक्स योजना के तहत महाराणा प्रताप से जुड़े गोगुंदा, चावंड, दिवेर व छापली में विकास कार्यों के लिए 675 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई।

-मेवाड़ कॉम्पलेक्स योजना फेज 2 -

स्वीकृत वर्ष - 2015-16

स्वीकृत राशि - 767.23 लाख रुपए

फेज द्वितीय के तहत चावंड, गोगुंदा, दिवेर, छापली, हल्दीघाटी में पर्यटन विकास के कार्योें के लिए 767.23 लाख की राशि स्वीकृत की गई। इसमें हल्दीघाटी के लिए 360.89, गोगुंदा 158.94, दिवेर 135.2, छापली 48.75 और चावंड स्मारक के लिए 63.45 लाख की राशि स्वीकृत की गई। इन योजनाओं की कार्यकारी एजेंसी राजस्थान पर्यटन विकास निगम लिमिटेड, जयपुर रही।

इनका कहना ...

बजट में प्रताप सर्किट की घोषणा की गई है। इससे इन सभी स्थलों का संरक्षण व संवर्द्धन किया जाएगा। ये सर्किट विकसित करने के लिए पहले कंसल्टेंसी टीम आएगी और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाएगी। इसके बाद एजेंसी का चुनाव होगा और उसके अनुरूप योजना बनाकर कार्य प्रारंभ किए जाएंगे। इसका फायदा यह होगा कि इन सभी स्थलों की उचित देखरेख हो सकेगी और पर्यटकों की यहां तक पहुंच बनेगी।शिखा सक्सेना, उपनिदेशक, पर्यटन विभाग