
फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। वैसे तो प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि होती है किन्तु फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की शिवरात्रि का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की वैवाहिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस बार महाशिवरात्रि पर कई शुभ योग बन रहे हैं।
पं. जगदीश दिवाकर के अनुसार महाशिवरात्रि के साथ शुक्र प्रदोष व्रत भी है। जिससे इसका महत्व बढ़ जाएगा। साथ ही इस दिन शिव योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है, इससे योगों में किए गए व्रत, पूजा-पाठ और शुभ कार्य का कई गुना ज्यादा फल मिलता है।
फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 8 मार्च को रात 09.57 से 09 मार्च शाम 06.17 तक रहेगी लेकिन शिवरात्रि को पूजा रात में होती है, इसलिए इसमें उदयातिथि देखने की आवश्यकता नहीं होती।
मंदिरों में होंगे आयोजन
शहर के विभिन्न मंदिरों में भी इस दिन विशेष आयोजन होंगे। भक्त दर्शनों के लिए पहुंचेंगे। महाशिवरात्रि के दिन महादेव का बिल्व पत्र, धतूरा, दूध, दही, शर्करा आदि से अभिषेक किया जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत को रखने से साधक के सभी दुखों, पीड़ाओं का अंत तो होता ही है, साथ ही मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है। शिव की साधना से धन-धान्य, सुख-सौभाग्य,और समृद्धि की कभी कमी नहीं होती।
चारों प्रहर के पूजन का समय
8 मार्च : शुक्रवार रात्रि - प्रथम प्रहर पूजा समय : शाम 06:25 से 09:28 रात्रि तकरात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय : रात्रि 09:28 से 12:31 तक
09 मार्च : रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय : मध्यरात्रि 12:31 से 03:34 तकरात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय: प्रातः 03:34 से 06:37 तक
Updated on:
03 Mar 2024 04:04 pm
Published on:
03 Mar 2024 03:29 pm
बड़ी खबरें
View Allउदयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
