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हर रात उपेक्षा का ‘सन्नाटा, दिन में कई बार कोई नहीं आता

medical and health department प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पई में रात के समय रहता है ताला, चहेतों की प्रतिनियुक्ति ने बिगाड़ी चिकित्सा व्यवस्थाएं

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हर रात उपेक्षा का 'सन्नाटा, दिन में कई बार कोई नहीं आता

हर रात उपेक्षा का 'सन्नाटा, दिन में कई बार कोई नहीं आता

उदयपुर/ झाड़ोल. medical and health department चिकित्सा विभाग की बागडोर संभाल रहे जिले के 'जिम्मेदारों की उनके चहेतों से 'सांठ-गांठ ग्रामीण स्वास्थ्य के लिए एक बार फिर से संकट बनती दिख रही है। व्यवस्था सुधार को दम भरने वाले ये जिम्मेदार प्रतिनियुक्ति की आड़ में चहेते चिकित्सकों की जिला मुख्यालय पर सेवाएं ले रहे हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में आम जनता मौसमी बीमारियों के बीच स्वास्थ्य सुधार को लेकर दर-दर की ठोंकरे खाने को मजबूर है। राजस्थान पत्रिका की ओर से चल रहे 'स्वास्थ्य से खिलवाड़Ó अभियान के तहत संवाददाता ने पई स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के हाल देखें तो कुछ कड़वे सच से सामना हुआ। ग्रामीणों से बातचीत में पता चला कि नाम के लिए सरकारी सुविधा पर हर शाम छह बजे ताला लग जाता है। पूरी रात इस परिसर में सन्नाटा पसरा रहता है। यूं कहें कि दिन में भी कभी कभार इस पीएचसी पर दोपहर दो बजे बाद ही जिंदगी सूनी हो जाती है। मजबूरी में मरीजों को उपचार के लिए मुख्यालय का मुंह करना होता है। रात में गर्भवती महिलाओं को हर हाल में मुख्यालय स्थित चिकित्सालय की शरण में जाना होता है। खास बात सामने आई कि पई में दो चिकित्सकों के स्वीकृत पद के एवज में सेवाएं देने वाले चिकित्सक डॉ. विकास मीणा को सीएमएचओ उदयपुर ने प्रतिनियुक्ति पर उदयपुर मुख्यालय लगाया हुआ है। वहीं नाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. जयप्रकाश मीणा को प्रतिनियुक्ति पर यहां लगाया हुआ है। ऐसे में दोनों ही चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सवालों के घेरे में बनी हुई है।

कहानी बताते आकड़े
पीएचसी पई का शुभारंभ: 27 नवम्बर 1992
स्वीकृति चिकित्सक पद दो: सेवारत (प्रतिनियुक्ति पर) एक
आयुष चिकित्सक का स्वीकृत पद एक: सेवारत
नर्सिंग स्टाफ की स्वीकृत संख्या 4: सेवारत दो
प्रसाविका के स्वीकृत पद 2: सेवारत एक

घायलों की भी नहीं सुध
शाम के बाद पीएचसी पर पडऩे वाले ताले की समस्या का दंश ग्रामीण और गर्भवती महिलाएं ही नहीं देख रही। यहां सड़क दुर्घटनाओं के घायलों को भी उपचार के नाम पर सेवाएं नसीब नहीं हो रही। आए दिन दुर्घटनाओं में आने वाले युवकों को आनन-फानन में मुख्यालय जाना पड़ता है। भूलवश पीएचसी पर आने वाले घायलों और उनके परिजनों को निराशा का मुंह देखना पड़ता है।

उपेक्षा भी इस कदर
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की पई पीएचसी को लेकर बेरूखी यहीं तक नहीं सीमित है। बल्कि सत्यता है कि लोगों के स्वास्थ्य को दांव में रखकर मुख्यालय ने यहां सुविधा के तौर पर लगे रोगी वाहन 104 को नाई पीएचसी पर स्थानांतरित कर दिया। यानी चिकित्सक की बेरूखी के साथ वाहनों की सुविधा भी ग्रामीणों के लिए 'सौतेलीÓ हो गई है।

मासिक 8 प्रसव, ओपीडी 50 की
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द पर प्रतिदिन करीब 50 मरीजों की ओपीडी होती है। वहीं प्रतिमाह औसत 7 से 8 प्रसव होते हैं। हाई रिस्क प्रसव को उदयपुर रैफर किया जाता है। यहां सुविधा के तौर पर लगाया हुआ इनवर्टर भी बीते एक साल से खराब पड़ा है। सफाई कार्मिकों की सुविधा के बावजूद यहां संचालित दवाघर, लेबारेट्री, वार्ड सहित अन्य कमरों में केवल धूल छाई हुई है। कहने के लिए दो सफाईकर्मी यहां सेवाएं दे रहे हैं।

एलटी की निजी दुकान!
केंद्र में सेवारत एलटी पर आरोप है कि उसने यहां केंद्र के समीप किराए की दुकान चला रखी है। नियमों से परे जाकर सरकारी छाप के आधार पर एलटी लोगों को दवाई पर्ची लिखकर उपचार कर रहा है।

गलत है तरीका
स्वीकृत पद के जवाब में चिकित्सक को प्रतिनियुक्ति पर गलत लगाया गया है। नाई से प्रतिनियुक्ति पर लगाया चिकित्सक नियमित नहीं आता। मरीज भटक रहे हैं।
देवीलाल, सरपंच, ग्राम पंचायत पई

पसरा रहता है सन्नाटा
शाम 6 बजे बाद तो स्वास्थ्य केंद्र पर तोते उड़ते हैं। घायलों, गंभीर रोगियों और गर्भवती महिलाओं को मजबूरी में शहर मुख्यालय ही जाना पड़ता है। रात को केंद्र खुलने की कोई उम्मीद नहीं रहती।
दिनेश कटारा, पूर्व सरपंच, ग्राम पंचायत पई

एनसीडी नोडल अधिकारी
पहले तीन चिकित्सक थे। इस बीच एक को जिला एनसीडी नोडल अधिकारी व दिव्यांग प्रमाण-पत्र प्रभारी बनाया है। medical and health department नए चिकित्सक को पाबंद करेंगे। नए चिकित्सक आते ही पद भरेंगे।
डॉ दिनेश खराड़ी, जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उदयपुर