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जिंदगी ने कदम-कदम पर दी मुश्किलें लेकिन नहीं मानी हार, मिलिए, जीत का जज्बा सिखाने वालीं पीटीआई अंजू से

पीटीआई अंजू ने साबित किया महिलाएं भी हो सकती हैं बेहतर कोच, गाइड, उदयपुर के राउमावि मनवाखेड़ा में शारीरिक शिक्षक अंजू चौधरी स्कूली बच्चों का खेलों में संवार रहीं भविष्य, मास्टर ट्रेनर के रूप में दे रहीं पिछले 7 सालों से आत्मरक्षा प्रशिक्षण

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मधुलिका सिंह/उदयपुर. हर रोज गिरकर भी मुकम्मल खड़े हैं, ऐ जिंदगी देख मेरे हौसले तुझसे भी बड़े हैं.. कुछ ऐसे ही हौसले लेेकर जिंदगी की मुश्किलों का सामना करती आई है उदयपुर के राउमावि मनवाखेड़ा में शारीरिक शिक्षक और सेल्फ डिफेंस मास्टर ट्रेनर अंजू चौधरी। अंजू चौधरी ने पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में अपनी एक जगह बनाई है। दरअसल, पीटीआई का नाम सुनते ही लोग केवल पुरुष पीटीआई के बारे में ही सोचते हैं। लेकिन, महिलाएं भी कोच हो सकती हैं या किसी स्पोट्र्स का गाइडेंस दे सकती हैं, ये सुनकर उन्हें आश्चर्य होता है। ये एक चुनौती ही थी और इसके बाद आत्मरक्षा प्रशिक्षक के रूप में एक और नई चुनौती सामने आई। कुछ भी ना जानते हुए भी इसके लिए खुद को तैयार किया और अब एक मास्टर ट्रेनर बन कर हजारों छात्राओं और शिक्षिकाओं को प्रशिक्षण दे चुकी हैं।

पति को खोया लेकिन हौसला नहीं

अंजू चौधरी ने बताया कि वे मूलत: भरतपुर की निवासी हैं लेकिन 18 साल में शादी के बाद वे पति के साथ उदयपुर आ गईं। बाकी की शिक्षा भी उदयपुर से ही की। पहले पति जॉब नहीं करने देना चाहते थे, लेकिन जब फिजिकल ट्रेनर की भर्ती निकली तो तैयारी की। मेरिट में स्थान भी बना लिया और उसी के आधार पर स्कूल भी मिल गया। 3 साल पहले उनके पति का देहांत हो गया। ऐसे में घर की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ पड़ी। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपने दोनों बेटों को पढाने के साथ स्कूल के बच्चों के लिए वे रात-दिन मेहनत करती हैं। इसी का परिणाम है कि आज कई बच्चों का राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए चयन हुआ है।

दो हजार से अधिक बालिकाओं को सिखा चुकी आत्मरक्षा के गुर

अंजू ने बताया कि बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए वे वर्ष 2015-16 से निरंतर आत्मरक्षा प्रशिक्षण देकर ना सिर्फ बालिकाओं, बल्कि ब्लॉक और जिला स्तर की विभिन्न अध्यापिकाओं को भी आत्मरक्षा के गुर सिखा रही हैं। अब तक वे जिले की दो हजार से अधिक बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। इसके लिए वे खुद भी अभ्यास करती हैं। वे बताती हैं कि आत्मरक्षा प्रशिक्षण के बारे में वे भी कुछ सालों पहले तक कुछ नहीं जानती थीं। लेकिन, सीखने का जज्बा कायम रखा तो इसकी अहमियत भी पता चली। उनके अनुसार, हर महिला और बालिका को आत्मरक्षा के गुर जरूरी तौर पर सीखने चाहिए। इससे एक अलग आत्मविश्वास आ जाता है।