
उमेश मेनारिया/ मेनार. बर्ड विलेज मेनार की खूबसूरती में चार चांद लगाने कुछ वर्षोंं पूर्व हिमालय क्षेत्र से एक नन्हा मेहमान आया था जिसका नाम है ग्रेट क्रस्टेड ग्रेब पक्षी। बेइंतहा खूबसूरत इस पक्षी को मेनार की आबोहवा इतनी रास आई की उसने यहींं अपना आवास बना लिया। कुछ महीनों के लिए सर्दियों में प्रवास पर आने वाला ये पक्षी अब यहींं का स्थानीय होकर रह गया । मेनार को इस पक्षी की वजह से काफी ख्याति मिली है जो अपने आप में राज्यभर में इसके प्रजनन का एक रिकॉर्ड है। हाल ही में आईबीए के रूप में नामित हुए मेनार का धण्ड तालाब परिंदो के लिए मुुफ़ीद है । ग्रेट क्रस्टेड ग्रेब प्रवासी पक्षी जो हिमालय क्षेत्र की तराइयोंं में ब्रीडिंग करता है उसने पिछले वर्षोंं में मेनार को अपना आशियाना बना लिया है या यूंं कहेंं मेनार के जलाशय उसके लिए हिमालय की तराई की तरह मुफीद स्थल बन चुकेे हैंं। यहां हजारोंं परिंदोंं को भोजन और रहने के लिए मुफीद माहौल उपलब्ध है। इससे यहां सकारात्मक नतीजे देखने को मिल रहे हैं। बेहतर आवास उपलब्ध होने से लगातार पक्षियों की संख्या बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
हिमालय की तराई में करता है ब्रीडिंग अब मेनार में आवास
डॉ सतीश शर्मा के अनुसार ये एक जलीय पक्षी है, जो ज्यादातर समय पानी में ही रहता है। ग्रेब परिवार में आकार में ये सबसे बड़े होते हैं। ये पक्षी खड़े पानी के जलाशयों , लैगून , धीरे बहने वाली नदिया और यहां तक राजस्थान के खानों में भरे हुए पानी में भी इस प्रवासी पक्षी को देखा गया है। रामपुरा माईन भीलवाड़ा में खदानों में भरे पानी में इस पक्षी को कई बार देखा गया है। ये देशांतर गमन करने वाला पक्षी है जो शीत ऋतु में अनेक इलाक़ो में प्रवास करने आता है । ये हिमालय , मध्य एशिया , यूरोप के समीपवर्ती इलाक़ो से सर्दी के दिनों में यहां आता है वही फरवरी माह में पुनः मूलतः स्थानों पर लौट जाता है। ये पक्षी यहां प्रजनन नही करता है। लेकिन खास बात ये देखी गई इस पक्षी ने अपनी जैविक परम्पराओं और प्राकृतिक आवास को छोड़कर उदयपुर जिले के बर्ड विलेज मेनार के धण्ड तालाब में स्थाई बसेरा कर लिया है वही घोंसले बनाकर प्रजजन का कार्य शुरू कर दिया है । वही घोसलों पर पक्षी बैठने एव छोटे 1- 2 बच्चो को इनके साथ तैरते हुए भी देखा गया है। पिछले वर्षो में इस पक्षी के मेनार में परिवार बढ़ते हुए देखने की जानकारी सामने आयी है। जो मेवाड़ ही नही राज्य भर के लिए सुखद संकेत है ।
तैरता हुआ घोंसला बनाता है , शर्मिला है ग्रेट क्रस्टेड ग्रेब
ये पक्षी अपना घोंसला पानी के किनारे दलदली क्षेत्र में उगी हुई वनस्पति में बनाते हैं। कई बार इनके घोंसले पानी के ऊपर तैरते हुए दिखते हैं। वही जलाशय के उस क्षेत्र में अपना घोंसला बनाता है जंहा पानी किनारे हल्की कुछ जलीय वनस्पति उगी हुई हो उन्ही को मोड़कर ये पानी में तैरता हुआ घोंसला बनाता है। ये पक्षी बहुत शर्मिला स्वभाव का होता है। ये पक्षी अच्छे गोताखोर हैं। अपने पंजों की सहायता से पानी में तेजी से तैरते है। पानी के नीचे तैरते हुए ही ये अपने शिकार को पकड़ते है। ये अच्छी तैराकी के साथ गोताखोर में भी निपुण है। इसके पैरो की अंगुलियों में जाल होता है जिसे आसानी से तैरता है। इन पक्षियों का मुख्य भोजन मछली, टेडपॉल, मेंढक व अन्य छोटे जलीय जीव होते हैं। पक्षी मित्र दर्शन मेनारिया व विधान दिवेधी ने बताया की मेनार के धण्ड तालाब जलाशय में ग्रेट क्रेस्टेड ग्रेब पक्षी के 3 जोड़ों ने घोंसले बनाये हुए हैं । इनमे से दो जोड़ो ने पहले चार बार बनाये गए घोंसलों को छोड़ नए घोंसले बनाते हुए अभी अंतिम घोंसले में अंडे दिए हैं । एक अन्य जोड़ा भी घोंसला बना रहा है।
प्रजनन काल में विचित्र व्यवहार दर्शाता है
ग्रेट क्रस्टेड ग्रेब पक्षी प्रजनन काल में नर मादा बड़ा विचित्र प्रणय व्यवहार करते है दोनो अपनी अपनी चोंच में हरे जलीय वनस्पति पत्ते टहनियां को लेकर आमने सामने होकर एक दूसरे के मुख देखकर प्रणय का निवेदन करते है । ये सब एक दूसरे की स्वीकृति देने और अपने बन्धन को मजबूत चाहने का प्रणय है। प्रजनन के समय नर व मादा पानी की सतह पर तेजी से एक दूसरे की तरफ दौड़ते है। इस दौरान ये अपनी छाती को सामने फुला लेते हैं और गर्दन को इधर-उधर हिलाते हुए पास आते हैं। इनका यह नजारा काफी अद्भुत व आकर्षक होता है। नर व मादा दोनों मिलकर अंडों को सेते हैं। दोनो ही बच्चो का लालन पोषण करते हैंं ।
Published on:
19 Feb 2020 06:42 pm
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