
स्त्रीरोग विशेषज्ञ देख रहे मौसमी बीमारी के मरीजों को, अव्यवस्थाओं को लेकर हंगामा
चंदनसिंह देवड़ा/उदयपुर. आमजन को सस्ती और सुलभ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए सरकार ने सेटेलाइट अस्पताल तो स्थापित कर दिए है लेकिन इनमें न तो जरूरत के मुताबिक डॉक्टर लगाए गए है और न ही पूरे संसाधन दिए है। इसका खमियाजा उप नगरीय क्षेत्र हिरणमगरी सहित आसपास रहने वाले लोग भुगत रहे हैं। हिरणमगरी स्थित राजकीय खेमराज कटारा चिकित्यालय में इन्हीं अव्यवस्थाओं के चलते सोमवार को हंगामा हो गया। दूसरी बार तारीख बदलने के बाद सोनोग्राफी के लिए आई गर्भवती महिला को फिर अगली तारीख दे दी गई। यहीं नहीं डेंगू की आशंका के चलते एक महिला को जांच करवाने के लिए बाहर भेज दिया गया। मरीजों के धक्के खाने की शिकायत पर ग्रामीण विधायक समेत कई लोगों ने अस्पताल में व्यवस्था सुधारने के लिए हंगामा कर दिया।
नाइट ड्यूटी के अगले दिन सोनोग्राफी पोस्टपोंड
सेटेलाइट अस्पताल में डॉ. तरुण व्यास रेडियोलोजिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैैंैं। महीने में 4 नाइट ड्यूटी होती है, इसके अगले दिन अवकाश ले लिया जाता है। उसमें जो भी सोनोग्राफी की तारीख दे रखी होती है उन्हें अगली तारीख पर आने को कह दिया जाता है। साथ ही न्यूमिनिकोसिस बोर्ड सदस्य होने से महीने में दो दिन बेकरिया, दो दिन वल्लभनगर पीएचसी पर भी जाते हैं। रोजाना 50 से 60 सोनोग्राफी होती है। सोमवार को संजूकुंवर को 30 सितम्बर की तारीख के बावजूद 2 अक्टूबर को आने को कहा। इस पर उसके परिजन भडक़ गए क्योंकि उन्हें पहले 26 और 28 सितम्बर की तारीख पर भी ऐेसे ही लौटाया गया था।
जांच उपलब्ध, फिर भी बाहर से करवाई
टेकरी निवासी ज्योति के पति को डेंगू होने पर उसकी भी तबीयत खराब हो गई। खुद को भी डेगंू की आशंका के चलते अस्पताल में दिखाया। उसे बाहर से जांच करवाने के लिए कहा गया। महिला सुबह बाहर से जांचें करवा कर लाई। एक मरीज को श्वान ने काटा लेकिन इंजेक्शन बाहर से मंगवाए गए। इस पर परिजनों ने ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा को शिकायत की और स्वयं भी एकत्रित होकर अस्पताल में पहुंच कर अधीक्षक का घेराव कर दिया। पूछताछ में सामने आया कि डॉ. ममता ने नाइड ड्यूटी पर महिला को चेक किया था और उसे 3 नम्बर कमरे में सुबह जांचें करवाने को कहा था। महिला किसके कहने पर डेंगू की जांच बाहर करवाकर आई।
आउटडोर बढ़ गया स्टाफ ही नहींं...
उप नगरीय क्षेत्र के सेटेलाइट अस्पताल में रोजाना औसतन 1500 के करीब आउटडोर है। 52 तरह की जांचें यहां होती है, लेकिन स्थिति यह है कि स्वीकृत 145 में से 5 डॉक्टरों समेत 50 कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं। आरएनटी मेडिकल कॉलेज के अधीन इस अस्पताल से 3 डॉक्टरों का वेतन तो यहां से उठता है, लेकिन सेवाएं वे आरएनटी में दे रहे हैं।
अधीक्षक तक नहीं मिलते, हंगामा
विधायक मीणा समेत जब कई लोग अस्पताल पहुंचे तो अधीक्षक डॉ. किनश धानका भी मौजूद नहीं थे। धानका को सप्ताह में तीन दिन आरएनटी में सेवाएं देनी होती है, जबकि तीन दिन सेटेलाइट में आना होता है। इस पर बायोमेट्रिक हाजिरी आरएनटी में ही होने से पूरे सप्ताह में आरएनटी जाते हैं। तीन दिन वे दोपहर बाद यहां आते हंै, जबकि बाकी समय में 12 बजे तक सेटेलाइट में आते हैं। उस पर विरोध हुआ कि वे सीट पर नहीं मिलते। कलक्टर को शिकायत करने पर एसडीएम गिर्वा को मौके पर भेजा गया। एमबी अस्पताल अधीक्षक डॉ. डीपी सिंह से स्थाई रूप से धानका को यहीं लगाने की मांग की जिसे स्वीकृति दे दी गई।
नर्सिग स्टाफ पर गिरी गाज
अधीक्षक धानका ने कहा कि हंगामे के बाद सोनोग्राफी तारीख देने वाली नर्सिंग स्टाफ को वहां से हटा दिया गया। वहीं डॉ. विनीत सिंघल ने रात को राउण्ड के समय बाहर से जांचे लिखी थी, जिनसे अतिरिक्त कलक्टर एवं मैने जवाब मांग लिया है।
इनका कहना...
सोनोग्राफी बढ़ गई है। नाइट ड्यूटी के अगले दिन दिक्कत हो रही है तो रेडियोलॉजिस्ट की दो सप्ताह हम नाइट ड्यूटी नहीं लगाएंगे। डॉक्टरों की कमी है, लेकिन मरीज बढ़ रहे हैैंैं, जो हैं उनके काम करवा रहे हैं। मेरे पास भी दो चार्ज है ऐसे में दौड़भाग रहती है।
डॉ. किशन धानक, अधीक्षक, सेटेलाइट अस्पताल, हिरणमगरी
पूरे समय न तो अधीक्षक मिलते हैं और न ही कोई डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी समझ रहे हैं। दवाएं और जांचें उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को बाहर भेजा जाता है। गरीब तबके का मरीज परेशान है। व्यवस्था नहीं सुधरी तो आंदोलन करेंगे।
फूलसिंह मीणा, ग्रामीण विधायक उदयपुर
Updated on:
01 Oct 2019 01:53 pm
Published on:
01 Oct 2019 01:48 pm
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