
उदयपुर. कृष्ण जन्माष्टमी के बाद भाद्रपद्र कृष्ण पक्ष नवमी पर मंगलवार को शहर के प्रमुख श्रीकृष्ण मंदिरों में नंदोत्सव मनाया गया। इस दौरान नंद बाबा, यशोदा मैया, ढाड़ा-ढाडिऩ और गोपियों व ग्वालों ने कृष्ण कन्हैया के जन्म पर खुशी में जमकर नृत्य किया। भक्तों ने हाथी घोड़ा, पालकी जय कन्हैया लाल की, नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की जैसे जयकारे लगाए और भजन की रसधारा बहाई।
जगदीश मंदिर में नंद उत्सव बड़े उत्साह से मनाया गया। इसमें नंदबाबा की भूमिका में वंशानुगत सेवायत पुजारी हुकम राज पुजारी रहे। वहीं, जानकी देवी यशोदा माता बनीं। इस दौरान भगवान को विशेष शृंगार धराया गया और झूले में विराजित कर झुलाया गया। कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से लगभग 3.30 बजे तक चला।
अस्थल मंदिर में के दूसरे दिन नंद महोत्सव मनाया गया जिसमें प्रात:काल भगवान का पंचामृत अभिषेक हुआ। शृंगार आरती के बाद ढाड़ा-ढाडिऩ ने बधाई गायन किया। वहीं, भक्तों ने भजन एवं नृत्य किया। सभी भक्तों को फल नारियल सीखे एवं मिठाई लुटाई गई।
श्रीनाथजी मंदिर में नंद उत्सव पर श्रीजी दर्शन के लिए आने वाले भक्त/वैष्णव आनंद से सरोबार हो गए। सेवादार नन्द बाबा, यशोदा मैया, गोपी और ग्वाल बन कर मंदिर में दही, दूध और केसरिया जल का एक-दूसरे पर छिडक़ते हुए बधाई देते हुए गा रहे थे।
इस्कॉन मंदिर में सुबह 9 बजे से कृष्ण भगवान के आगमन की खुशी में नन्दोत्सव समारोह मनाया। बेगूं इस्कॉन गुरुकुल के बालक व भक्त हरे कृष्ण-हरे कृष्ण के साथ गाते-नाचते रहे। इसी दिन श्रीलप्रभुपाद के 125 वें जन्मोत्सव भी होने से खुशी बढ़ गई। प्रभुपाद का प्रथम सभी वैष्णवों ने पंचामृत से अभिषेक किया, फूलों से सुन्दर शृंगार कर पुष्पाभिषेक किए छप्पन भोग प्रसाद धराया।
राधा बिहारी मंदिर में नन्दोत्सव व मटकी फोड़ मनोरथ मनाया। महन्त इन्द्रदेव दास ने बताया कि वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ दूध,दही,गंगा जल,हल्दी केसर मक्खन युक्त पंचामृत बनाकर भक्तों ने एक दूसरे पर छिडक़ाव किया। ढोल नगाड़ों, शंखनाद ,थाली और खुशी की ताली बजाते हुए मटकी फोड़ मनोरथ सम्पन्न हुआ।
जन्माष्टमी पर्व के आयोजन पर कोरोना के कारण इस साल झांकियां नहीं सजाई गई। लेकिन, दूसरे आयोजन हुए। सभी में कोरोना नियमों का ध्यान रखा गया। नंद उत्सव भी बड़ी धूमधाम से मनाया गया।
रास बिहारी शरण, महंत , स्थल मंदिर
जगदीश मंदिर में हर साल जन्माष्टमी का त्योहार पूरी धूमधाम से मनाया जाता रहा है। लेकिन कोरोना के कारण दो साल से आयोजन सीमित कर दिए हैं। मंदिर में भक्त भी कम ही रहे। मंगलवार को नंदोत्सव पर भी परंपरागत तरीके से जश्न मनाया गया।
रामगोपाल, पुजारी, जगदीश मंदिर
कोरोना प्रोटोकॉल के तहत भक्तों को सीमित संख्या में ही प्रवेश दिया गया। नंद उत्सव पर पांच मिल्क केक का समूह बनाकर काट कर जगन्नाथ राधाकृष्ण व प्रभुपाद के राजभोग धराया। आरती के बाद भक्तों को केक व छप्पन भोग प्रसाद परोसा।
मायापुरवासी दास, प्रबंधक, इस्कॉन मंदिर
दो दिवसीय जन्माष्टमी और नंद उत्सव आयोजन मंदिर में बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। भगवान से कोरोना महामारी को जल्द से जल्द समाप्त करने की प्रार्थना की गई ताकि अगले साल सभी भक्त इस आयोजन के साक्षी बन सकें।
कैलाश पुरोहित, अधिकारी, श्रीनाथजी की हवेली
Updated on:
01 Sept 2021 03:14 pm
Published on:
01 Sept 2021 03:10 pm
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