
उदयपुर. राजस्थान के लिए खुशखबर है कि मेवाड़ व राजस्थान में पाई जाने वाली कॉमन या इंडियन जेजेबेल तितली राष्ट्रीय तितली बनने की दौड़ में अब टॉप तीन दावेदारों में से एक है। वोटिंग के आधार पर कॉमन जेजेबेल के अलावा ऑरेंज ऑकलीफ और कृष्णा पीकॉक ने भी सबसे अधिक वोट हासिल किए हैं। अब इन तितलियों की लिस्ट पर्यावरण मंत्रालय को सौंपी जाएगी, जो राष्ट्रीय तितली का चयन करेगा। इसकी घोषणा भारत सरकार की ओर से होगी। गौरतलब है कि राष्ट्रीय तितली चुनने का अभियान 10 सितंबर से शुरू हुआ, जो 8 अक्टूबर तक चला। इसमें वोटिंग के माध्यम से पसंदीदा राष्ट्रीय तितली का चयन किया जाना था।
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राजस्थान वोटिंग में 10वें स्थान पर, सबसे ज्यादा वोट महाराष्ट्र से
राष्ट्रीय तितली चुनने के लिए राष्ट्रव्यापी मतदान राष्ट्रीय तितली अभियान कंसोर्टियम के तहत चलाया गया। इसमेें कुल 59 हजार 754 वोट मिले। इसमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र की ओर से 18,887 वोट किए गए। वहीं, तमिलनाडु ने 4789 वोट , छत्तीसगढ़ ने 4754 और पश्चिम बंगाल ने 3676 वोट किए। इसमें राजस्थान का स्थान 10वां रहा। यहां से 2108 वोट किए गए। राष्ट्रीय तितली चुनने की मुहिम के तहत भारत में पाई जाने वाली 1300 से अधिक में से सात सर्वश्रेष्ठ तितलियों पर वोटिंग कराई गई। इसके तहत फाइव बार स्वॉर्डटेल, इंडियन जेजेबेल, इंडियन नवाब, कृष्णा पीकॉक, ऑरेंज ऑकलीफ, नॉर्दर्न जंगल क्वीन, यलो गॉर्गन आदि 7 तितलियों को ऑनलाइन वोटिंग में सम्मिलित किया गया।
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वोटिंग में टॉप 15 राज्य
1. महाराष्ट्र - 18887
2. तमिलनाडु - 4789
3. छत्तीसगढ़ - 4754
4. पश्चिम बंगाल - 3676
5. कर्नाटक - 3198
6. मध्यप्रदेश - 2841
7. केरल - 2471
8. असम - 2457
9. आंध्रप्रदेश - 2368
10. राजस्थान - 2108
11. गुजरात - 1539
12. जम्मू - 1402
13. उत्तरप्रदेश - 1386
14. दिल्ली - 1352
15. तेलंगाना- 822
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इंडियन जेजेबेल इसलिए है सबकी पसंदीदा-
तितलियों पर शोध कर रहे डूंगरपुर के विशेषज्ञ मुकेश पंवार ने बताया कि राजस्थान में पाई जाने वाली तितलियों की लगभग 150 में से मेवाड़ व वागड़ में 112 प्रजातियों की तितलियां पाई जाती है। इंडियन जेजेबेल राजस्थान में पाई जाती है और पीले, लाल, सफेद और काले रंगों वाली इस सुंदर तितली के पंखों का विस्तार 66 से 83 एमएम होता है। ये तितली अपना जीवनचक्र डेण्ड्रोफ्थो फाल्काटा (वंडा या बंदा) नामक वनस्पति पर पूरा करती है। यदि इस तितली का चयन राष्ट्रीय तितली के रूप में होता है तो तितलियों के संरक्षण व संवद्र्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
Published on:
28 Oct 2020 10:29 pm
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