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नया सवेरा- नववर्ष एक, लेकिन पूरी दुनिया में अलग-अलग तरीके से मनाते

1 जनवरी यानी नया साल, नववर्ष

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नया सवेरा- नववर्ष एक, लेकिन पूरी दुनिया में अलग-अलग तरीके से मनाते

नया सवेरा- नववर्ष एक, लेकिन पूरी दुनिया में अलग-अलग तरीके से मनाते

भुवनेश पंडया

उदयपुर. 1 जनवरी यानी नया साल, नववर्ष। सब अपने-अपने तरीके से इसे मनाते हैं। जहां भारत में नए वर्ष की अपनी धूम 31 दिसम्बर की शाम ढलने से शुरू होकर एक जनवरी की शुरुआत यानी मध्यरात्रि पर परवान हो जाती है, तो कई सेलिब्रेशन ऐसे होते हैं जो पूरी-पूरी रात चलकर भोर तक पूरे परवान पर रहते हैं। आइए जानते हैं ऐसे कई सेलिब्रेशन के बारे में जो नववर्ष पर होते हैं खास। नए वर्ष का उल्लास, ये उत्साह दुनिया के अलग-अलग कोने में अलग-अलग दिन मनाया जाता है, क्योंकि दुनिया भर में कई कैलेंडर हैं और हर कैलेंडर का नया साल अलग-अलग होता है। एक अनुमान के अनुसार अकेले भारत में ही करीब 50 कैलेंडर, पंचाग हैं।

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- एक जनवरी को मनाया जाने वाला नववर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर पर आधारित है। इसकी शुरुआत रोमन कैलेंडर से हुई है। पारंपरिक रोमन कैलेंडर का नववर्ष एक मार्च से शुरू होता है। रोमन सम्राट जूलियस सीजर ने 47 ईसा पूर्व में इस कैलेंडर में परिवर्तन किया और इसमें जुलाई माह जोड़ा। इसके बाद उसके भतीजे के नाम के आधार पर इसमें अगस्त माह जोड़ा गया। दुनिया भर में आज जो कैलेंडर प्रचलित है, उसे पोप ग्रेगोरी अष्टम ने 1582 में तैयार किया था। ग्रेगोरी ने इसमें लीप ईयर का प्रावधान किया था।- ईसाइयों का एक अन्य पंथ ईस्टर्न आर्थोडॉक्स चर्च तथा इसके अनुयायी ग्रेगोरियन कैलेंडर को मान्यता न देकर पारंपरिक रोमन कैलेंडर को ही मानते हैं। इस कैलेंडर के अनुसार नया साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। इस कैलेंडर की मान्यता के अनुसार जॉर्जिया, रूस, यरूशलम, सर्बिया आदि में 14 जनवरी को नववर्ष मनाया जाता है।

- इस्लाम धर्म के कैलेंडर को हिजरी साल के नाम से जाना जाता है। इसका नववर्ष मोहर्रम माह के पहले दिन होता है। हिजरी कैलेंडर कर्बला की लड़ाई के पहले ही निर्धारित कर लिया गया था। मोहर्रम के दसवें दिन को आशूरा के रूप में जाना जाता है। इसी दिन पैगम्बर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन बगदाद के निकट कर्बला में शहीद हुए थे। हिजरी कैलेंडर के बारे में एक दिलचस्प बात यह है कि इसमें चंद्रमा की घटती-बढ़ती चाल के अनुसार दिनों का संयोजन नहीं किया गया है। लिहाजा इसके महीने हर साल करीब 10 दिन पीछे खिसकते रहते हैं।- चीन की बात करें तो वहां का भी अपना एक अलग कैलेंडर है। सभी पुरानी सभ्यताओं के अनुसार चीन का कैलेंडर भी चंद्रमा गणना पर आधारित है। इसका नया साल 21 जनवरी से 21 फ रवरी के बीच पड़ता है। चीनी वर्ष के नाम 12 जानवरों के नाम पर रखे गए हैं। चीनी ज्योतिष में लोगों की राशियां भी 12 जानवरों के नाम पर होती हैं। लिहाजा यदि किसी की बंदर राशि है और नया वर्ष भी बंदर आ रहा हो तो वह साल उस व्यक्ति के लिए विशेष तौर पर भाग्यशाली माना जाता है।- भारत भी कैलैंडरों के मामले में कम समृद्ध नहीं है। इस समय देश में विक्रम संवत, शक संवत, हिजरी संवत,फसली संवत, बांग्ला संवत, बौद्ध संवत, जैन संवत, खालसा संवत, तमिल संवत, मलयालम संवत, तेलुगु संवत आदि वर्ष प्रचलित हैं। इनमें से हर एक के अपने अलग-अलग नववर्ष होते हैं। देश में सर्वाधिक प्रचलित संवत विक्रम और शक संवत है। मान्यता के अनुसार विक्रम संवत गुप्त सम्राट विक्रमादित्य ने उज्जयनी में शकों को पराजित करने की याद में शुरू किया था। यह संवत 58 ईसा पूर्व शुरू हुआ था। विक्रम संवत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है।- इसी समय चैत्र नवरात्र प्रारंभ होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन उत्तर भारत के अलावा गुड़ी पड़वा और उगादी के रूप में भारत के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष मनाया जाता है। सिंधी लोग इसी दिन चेटीचंद्र के रूप में नववर्ष मनाते हैं। शक सवंत को शालीवाहन शक संवत के रूप में भी जाना जाता है। माना जाता है कि इसे शक सम्राट कनिष्क ने 78 ई. में शुरू किया था। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने इसी शक संवत में मामूली फेरबदल करते हुए इसे राष्ट्रीय संवत के रूप में अपना लिया। राष्ट्रीय संवत का नव वर्ष 22 मार्च को होता है, जबकि लीप ईयर में यह 21 मार्च होता है।

- पहली जनवरी को अब नये साल के जश्न के रूप में मनाया जाता है। एक-दूसरे की देखा-देखी यह जश्न मनाने वाले शायद ही जानते हों कि दुनिया भर में पूरे 70 नववर्ष मनाए जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि आज भी पूरी दुनिया कैलेण्डर प्रणाली पर एकमत नहीं हैं। 21वीं शताब्दी के वैज्ञानिक युग में इंसान अन्तरिक्ष में जा पहुंचा है, लेकिन कहीं सूर्य पर आधारित, कहीं चन्द्रमा पर आधारित तो कहीं सूर्य, चन्द्रमा और तारों की चाल पर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दुनिया में विभिन्न कैलेण्डर प्रणालियां लागू हैं। यही वजह है कि अकेले भारत में पूरे साल तीस अलग-अलग नव वर्ष मनाए जाते हैं। दुनिया में सर्वाधिक प्रचलित कैलेण्डर ग्रेगोरियन कैलेण्डर है। जिसे पोप ग्रेगरी तेरह ने 24 फ रवरी, 1582 को लागू किया था। यह कैलेण्डर 15 अक्टूबर, 1582 में शुरू हुआ। इसमें अनेक त्रुटियां होने के बावजूद कई प्राचीन कैलेण्डरों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आज भी मान्यता मिली हैं।

- जापानी नव वर्ष गनतनसाईं या ओषोगत्सू के नाम से भी जाना जाता है। महायान बौद्ध 07 जनवरी, प्राचीन स्कॉट में 11 जनवरी, वेल्स के इवान वैली में नव वर्ष 12 जनवरी, सोवियत रूस के रुढि़वादी चर्चों, आरमेनिया और रोम में नववर्ष 14 जनवरी को होता है। वहीं सेल्टिक, कोरिया, वियतनाम, तिब्बत, लेबनान और चीन में नव वर्ष 21 जनवरी को प्रारंभ होता है। प्राचीन आयरलैंड में नववर्ष 1 फ रवरी, 2011 को मनाया जाता है तो प्राचीन रोम में 1 मार्च, 2011 को। भारत में नानक शाही कैलेण्डर का नव वर्ष 14 मार्च से शुरू होता है। इसके अतिरिक्त ईरान, प्राचीन रूस तथा भारत में बहाई, तेलुगू तथा जमशेदी, जोरोस्ट्रियन का नया वर्ष 21 मार्च से शुरू होता है। प्राचीन ब्रिटेन में नव वर्ष 25 मार्च को प्रारंभ होता है।प्राचीन फ्र ांस में एक अप्रेल से अपना नया साल प्रारंभ करने की परंपरा थी। यह दिन अप्रेल फू ल के रूप में भी जाना जाता है। थाईलैंड, बर्मा, श्रीलंका, कम्बोडिया और लाओ के लोग 07 अप्रेल को बौद्ध नववर्ष मनाते हैं। वहीं कश्मीर के लोग अप्रेल में। भारत में वैशाखी के दिन दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों बंगलादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, कम्बोडिया, नेपाल, बंगाल, श्रीलंका व तमिल क्षेत्रों में नया वर्ष 14 अप्रेल को मनाया जाता है। इसी दिन श्रीलंका का राष्ट्रीय नव वर्ष मनाया जाता है। सिखों का नया साल भी 14 अप्रेल को मनाया जाता है। बौद्ध धर्म के कुछ अनुयायी बुद्ध पूर्णिमा के दिन 17 अप्रेल को नया साल मनाते हैं। असम में नववर्ष 15 अप्रेल को, पारसी अपना नववर्ष 22 अप्रेल को तो बेबीलोनियन का नव वर्ष 24 अप्रेल से शुरू होता है। प्राचीन ग्रीक में नव वर्ष 21 जून को मनाया जाता था। प्राचीन जर्मनी में नया साल 29 जून को मनाने की परंपरा थी और प्राचीन अमरीका में 1 जुलाई को। इसी प्रकार आरमेनियन कैलेण्डर 9 जुलाई, 2011 से प्रारंभ होता है जबकि म्यांमार का नया साल 21 जुलाई से।नव वर्ष उत्सव 4000 वर्ष पहले से बेबीलोन में मनाया जाता था लेकिन उस समय नए वर्ष का ये त्योहार 21 मार्च को मनाया जाता था जो कि वसंत के आगमन की तिथि भी मानी जाती थी। प्राचीन रोम में भी नव वर्षोत्सव के लिए चुनी गई थी। रोम के तानाशाह जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में जब जूलियन कैलेंडर की स्थापना की। उस समय विश्व में पहली बार 1 जनवरी को नए वर्ष का उत्सव मनाया गया। ऐसा करने के लिए जूलियस सीजर को पिछला वर्ष, यानी, ईसा पूर्व 46 इस्वी को 445 दिनों का करना पड़ा था।