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करीब 122 सालों बाद मानसून का दौर अगस्त में ही कमजोर पड़ा है। इसका कारण पछुआ हवाएं हैं। जबकि अब तक मेवाड़ में पूरे सितम्बर माह में भी बरसात होती आई है। वहीं, इस बार अगस्त में ही मानसून की बारिश थम गई है। बीच-बीच में जब मानसून सक्रिय हुआ तो केवल खंड वर्षा ही हुई। मौसम विज्ञानियों के अनुसार अब अगले सप्ताह से मानसून का अंतिम दौर सक्रिय होने वाला है, लेकिन पछुआ पवन सक्रिय रहीं तो ये दौर भी कमजोर व खंड वर्षा के रूप में ही होने की आशंका है।
सालों बाद अगस्त माह बीता सूखा
मौसमविद् प्रो. नरपतसिंह राठौड़ के अनुसार पिछले 122 बाद पहली बार ऐसा देखने को मिला कि ठंडी, नमी युक्त तेज गति से उतरी अरब सागर से आने वाली पछुआ पवनों के कारण मेवाड़ सहित राजस्थान में अगस्त माह में सबसे कर्म वर्षा हुई और सूखे की िस्थति बनी है। वहीं, पिछले 20 दिनों से उदयपुर मेवाड़ सहित राजस्थान के अधिकांश भागों पर गहरे घने बादल छाए हुए हैं, लेकिन लगातार तेज पछुआ पवन चलने से मानसून का चौथा दौर बहुत ही कमजोर रहा। अगले कुछ दिनों में पछुआ पवन चलती है तो मानसून का अंतिम दौर भी कमजोर रह सकता है।
पछुआ हवाओं से तापमान नहीं बढ़ने और अवदाब नहीं बनने से बरसात भी कम
प्रो. राठौड़ के अनुसार उत्तरी अरब सागर से नमीयुक्त हवाओं पर पछुआ पवन के असर से तापमान नहीं बढ़ने। साथ ही बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर में अवदाब नहीं बनने से अगस्त में बरसात कम हुई है। मेवाड़ सहित राजस्थान में विशेष रूप से वर्ष 1965-66, 1966-67, 1972-73, 1979-80, 1987-88 1991-92 में बड़े स्तर पर सूखा एवं अकाल रहा था। यद्यपि इस बार अकाल कि स्थिति नहीं बनी, लेकिन अगले सप्ताह में बरसात नहीं होती है तो सूखा पड़ने की स्थिति बनेगी, जिससे अन्न उत्पादन पर बुरा असर पड़ सकता है।
Updated on:
31 Aug 2023 10:00 pm
Published on:
31 Aug 2023 09:59 pm
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