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उदयपुर दुनिया के टॉप शहरों में शुमार लेकिन यहां आने वाले पर्यटक इस कारण होते हैं परेशान…

लेकसिटी में साइन बोर्ड के अभाव में टूरिस्ट के लिए शहर भूल-भुलैया

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केस 1 - गुजरात से दोस्तों के साथ आए पर्यटक जतिन शाह को अमराई घाट पहुंचना था, लेकिन कोई साइन बोर्ड नहीं होने से वे बार-बार रास्ता पूछने को मजबूर हुए। उन्होंने गूगल मैप का भी सहारा लिया, लेकिन अंदरूनी शहर के रास्ते में भटक गए।

केस 2 - दिल्ली से सोलो ट्रिप पर आई समीक्षा बहल एक सोलो ट्रेवलर और ब्लॉगर हैं। समीक्षा को शहर के बाहुबली हिल्स, रामपोल आदि जगहों को एक्सप्लोर करना था, लेकिन शहर में कहीं भी मैप्स और साइन बोर्ड नहीं होने से वह इन जगहों तक पहुंचने के लिए भटकती रहीं।

लेकसिटी को दुनिया के दूसरे सबसे खूबसूरत शहर का दर्जा मिल चुका है तो इसकी गिनती 16 सबसे रोमांटिक शहरों में की जाती है। हाल ही ट्रैवल मैग्जीन ट्रैवल एंड लीजर ने फेवरेट सिटी इन द वर्ल्ड की लिस्ट में उदयपुर को दूसरा स्थान दिया है। यहां आने वाले पर्यटक यहां की प्राकृतिक खूबसूरती, पहाड़, जंगल, झीलें और हवेलियां, किले आदि विरासतों से प्रभावित होकर आते हैं। लेकिन,शहर में आने वाले पर्यटक इन खूबसूरत पर्यटन स्थलों के दीदार करने पहुंचना चाहते हैं तो उन्हें वहां तक पहुंचने के लिए अक्सर भटकना पड़ता है। शहर में अधिकतर पर्यटन स्थलों के लिए साइन बोर्ड नहीं लगा रखे हैं। ना ही किसी तरह के मैप्स ही हैं, ऐसे में उन्हें निराशा होती है। जहां कहीं साइन बोर्ड लगे हैं तो वो टूट गए हैं।

आधुनिक साइन बोर्ड लगवाने की जरूरत

लेकसिटी में हर माह हजारों-लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटक असमंजस में पड़ जाते हैं कि उन्हें पर्यटन स्थलों पर पहुंचने के लिए किस तरफ जाना है। शहर के पर्यटन स्थलों में अब कई नए आकर्षण जुड़ गए हैं। ऐसे में पर्यटक उन्हें भी देखना चाहते हैं। जबकि अब भी बाहर से आने वाले पर्यटक अपनी गाडि़यों में बैठे हुए चौराहे पर रुककर दुकानदारों या आम लोगों से रास्तों की जानकारी लेते नजर आते हैं। कई बार जानकारी के अभाव में लोग अपने गंतव्य से आगे निकल जाते हैं। कई पर्यटक सोलो ट्रिप पर निकले होते हैं, ऐसे में उन्हें भी साइन बोर्ड ना होने के अभाव में भटकना पड़ जाता है। जबकि इस डिजिटल दौर में शहर का प्रचार-प्रसार करने वाले आधुनिक डिस्प्ले बोडर्स अथवा साइन बोर्ड हर जगह लगे होने चाहिए ताकि पर्यटक उनसे आकर्षित होकर वहां तक आसानी से पहुंच सके।

पर्यटन विकास समिति की बैठक में भी उठ चुका मुद्दा

पर्यटन विकास समिति की बैठक में भी शहर में पर्यटन स्थलों के साइन बोडर्स लगाने को लेकर मुद्दा उठ चुका है। शहर में कहीं पर भी पुराने व नए पर्यटन स्थलों के आकर्षक साइन बोर्ड नहीं लगा रखे हैं। नई जगहों को लेकर भी प्रचार-प्रसार के लिए मैप्स होने चाहिए। इस संबंध में पर्यटन विभाग व यूआइटी को निर्देशित किया जा चुका है। पर्यटन व्यवसायियों के अनुसार, हर बार शहर की तुलना विदेश के खूबसूरत शहरों से की जाती है लेकिन वहां हर जगह पर साइन बोर्ड, इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड, मैप्स आदि लगे होते हैं। ऐसे में वहां घूमने में कोई परेशानी नहीं आती है।

इनका कहना है...

शहर में साइन बोडर्स के लिए पर्यटन विकास समिति में बात रखी गई थी। साइन बोर्ड इंफॉर्मेटिव और डायरेक्शनल होते हैं। डायरेक्शनल ऐसे होने चाहिए जो एक्सप्रेसिव हों यानी पर्यटन स्थल की खासियत बयां करते हों जैसे बायो पार्क में कोई जंगली जानवर को दिखाते हुए साइन बोर्ड होना चाहिए। आजकल कई तरह के आधुनिक साइन बोर्ड चलन में हैं। ऐसे साइन बोर्ड शहर में होने चाहिए।

शिखा सक्सेना, पर्यटन उपनिदेशक