
उदयपुर. पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत शुक्रवार से होगी। वक्त के साथ घरों की दहलीज को सजाने की परंपरा भी बदल गई है। करीब एक दशक पूर्व तक शहर में गेरू (लाल रंग की विशेष मिट्टी) लेकर घूमने वाले ग्रामीण अब दिखाई नहीं देते। इसका कारण यह है कि शहर से 25 किलोमीटर दूर इसवाल गांव के पास लाल मिट्टी पहाड़ हुआ करता था। इसकी मिट्टी को दीपावली से पूर्व खोदकर ग्रामीण शहर में बेचा करते थे। यह पहाड़ पिंडवाड़ा हाईवे में दब गया। ऐसे में अभी गेरू आ तो रहा है, लेकिन गुजरात, एमपी आदि से। इसकी बिक्री भी सड़क किनारे रंगोली का सामान बेचने वाले और दीपक बेचने वाले छोटे व्यवसायी ही कर रहे हैं। कभी शहर की हर दहलीज गेरू से ही सजा करती थी। मेवाड़ में अब भी इस परंपरा को निभाया जा रहा है। इसके तहत छोटी सी रंगोली ही गेरू से बनाई जाती है। एक दशक पूर्व तक हर आंगन और दहलीज पर गेरू और चूने से विशेष सजावट की जाती थी, मगर अब इनकी जगह रंगों ने ले ली है। ऐसे में गेरू से आंगन एवं दहलीज सजाने की परंपरा सीमित हो गई है। दीपावली पर्व पर मेवाड़ में घर-घर पर गेरू के मांडणे एवं धनदेवी लक्ष्मी के पंगलिये बनाए जाते थे, अब यह नजारा कहीं-कहीं देखने को मिलता है। अधिकतर घरों में डिब्बाबंद रेडिमेड रंगों से ही सजावट की जा रही है। हालांकि रंग आज भी गेरूआ ही उपयोग में लिया जा रहा है।
ऐसे होती थी सजावटगेरू को पत्थर या मूसल से पीसकर महीन किया जाता था। इसके बाद पानी में गलाया जाता था। इस घोल में कपड़े को भीगो कर घरों की दहलीज को लाल रंग में पोता जाता था। धनतेरस के दिन सुबह-सुबह अधिकतर घरों की दहलीज गेरू से पोत कर इस पर चूने से रंगोली बनाई जाती थी।
चूने से बनाई जाती थी डिजाइन
गेरू रंगने के बाद दहलीज पर चूने के घोल और कपड़े से मांगलिक मांडणे बनाए जाते थे। मांडणे के लिए रूई या कपड़े से ब्रश बनाया जाता था। चूने के घोल से आंगन के चारों ओर बेल-बूटा, दीपक, स्वस्तिक, पगलिये, फूल-पत्तियां आदि बनाए जाते रहे हैं।
शहरों में सीमित हुई गांवों में जीवित है परंपरा
धनतेरस के दिन गेरू से घरों के आंगन को सजाने की परंपरा आज भी जीवित है। इसके तहत सुबह-सुबह महिलाएं एकत्रित होकर मिट्टी की खदान पर जाती है। वहां से जरूरत के अनुसार मिट्टी लेकर मंदिर में दर्शन कर घर पहुंचती है। आंगन को लीपने के बाद घेरू से दहलीज और आंगन को रंगकर मांडणे बनाए जाते हैं। शहरों में गेरू से छोटी सी रंगोली बनाई जाने लगी है। अन्य रंगोली कलर से ही बनाई जाती है।
Published on:
10 Nov 2023 09:40 pm
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