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ऑनलाइन फूड एप्स का मायाजाल, डाल रहे ग्राहकों की जेब पर डाका

केस 1 - नमन ने फूड डिलीवरी एप से एक पित्जा ऑर्डर किया। उस पर चीज, कॉर्न और अन्य टॉपिंग्स के लिए अलग-अलग चार्ज था। यानी जो टॉपिंग्स एड करवाएंगे, उसका चार्ज बढ़ जाएगा। ऐसे में जो पित्जा 150 से 200 रुपए में किसी भी रेस्टोरेंट में मिल जाता है, वही पित्जा ऑनलाइन मंगाने पर लगभग 350 से 400 रुपए में पड़ रहा है। इसमें डिलीवरी चार्जेज, टैक्स भी शामिल थे। केस 2 - आकाश ने कुछ दिनों पूर्व ऑनलाइन खाना मंगवाया, उस पर कुछ छूट दे रखी थी लेकिन ऑर्डर के बाद जब पेमेंट करने का विकल्प आया तब तक वही खाना 500 रुपए तक पड़ गया। दरअसल, छूट के बावजूद जो अतिरिक्त टैक्स व डिलीवरी चार्जेज मिलाकर अधिक भुगतान करना पड़ गया। जबकि इतने में रेस्टोरेंट में जाकर खाना हो जाता।

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online food delivery

File photo

मधुलिका सिंह/उदयपुर. अगर आप भी किसी रेस्टोरेंट या होटल में नहीं जाकर वहां का खाना घर पर ही खाना चाहते हैं तो ये आजकल इतना आसान हो गया है कि एक क्लिक के जरिये वो आपके घर आ जाता है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी एप्स की जैसे बाढ़ आ चुकी है, लेकिन जिस एप से आपने खाना ऑर्डर किया है, वह रेस्टोरेंट के ऑफलाइन बिल से कई गुना ज्यादा पैसे वसूल रहा है। यह कई ग्राहक भुगत चुके हैं, लेकिन इसकी शिकायत वे नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि इसके लिए अब तक कोई ठोस कानून ही नहीं है। ऐसे में ग्राहक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। दरअसल, कई ग्राहकों ने जब एक रेस्टोरेंट में बैठकर ऑर्डर करना और फूड डिलीवरी एप पर ऑर्डर करना दोनों ही कीमतों की तुलना की तो उसमें भारी अंतर पाया गया।

रेस्टोरेंट में खाना ऑनलाइन फूड मंगाने से सस्ता

इस संबंध में फूड एप का उपयोग करने वाले ग्राहकों ने बताया कि जब आप होटल या रेस्टोरेंट में जाकर खाना खाते हैं तो यह ऑनलाइन एप के मुकाबले 10 से 60 प्रतिशत तक सस्ता पड़ता है। जिस डिश को आप होटल में बैठकर 100 रुपए में खा सकते हैं उसे घर पर मंगाने पर आपको 150 से 200 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में खाने का दाम 60 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। फूड की होम डिलीवरी करने पर रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी कंपनी को कुछ अन्य खर्च लगते हैं जिसे डिलीवरी चार्ज में शामिल किया जाता है। इसमें खाने को सही तरह से पैक करने का शुल्क, इसके बाद गर्म खाने व समय पर डिलीवरी करने में लगने वाला शुल्क, कंपनी के एडवरटाइजिंग का शुल्क और फिर एप को अलग से मिलने वाला कमीशन शुल्क आदि इन सभी शुल्कों के कारण खाने के शुल्क में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हो जाती है और आपको ज्यादा शुल्क देना पड़ता है। ये बात एक सर्वे में भी साबित हुई है।

उदयपुर में सबसे ज्यादा ऑर्डर की जाने वाली डिश रही मैक टिक्की

उदयपुर में एक फूड डिलीवर एप पर 2022 में लगभग 500 से ज्यादा रेस्टोरेंट शामिल रहे। इसी के साथ पूरे राजस्थान में 4500 से ज्यादा रेस्टोरेंट और अन्य भोजनालय इस पर जुड़े हैं। उदयपुर में सबसे ज्यादा ऑर्डर की जाने वाली डिश मैकआलू टिक्की बर्गर रही, जबकि पूरे राजस्थान में ऑर्डर के मामले में समोसा नंबर 1 पर रहा। स्नैक में राजस्थान में नंबर 1 पर समोसा रहा, जबकि उदयपुर में नंबर 1 पर पोहा और उसके बाद समोसा और दाल कचौड़ी रही। उदयपुर में सबसे ज्यादा ऑर्डर होने वाला डेजर्ट गुलाब जामुन रहा जबकि पूरे राजस्थान में चोको लावा केक को डेजर्ट के रूप में सबसे ज्यादा पसंद किया गया।

इनका कहना है..

राज्य सरकार ने ऑनलाइन सर्विसेस को लेकर अब तक कोई नियम-कानून नहीं बनाए है। ऐसे में इस पर किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती है। यदि नियम बना लेंगे और रेट तय कर लेंगे तो इस संबंध में कुछ किया जा सकता है। वहीं, इस संबंध में खाने की गुणवत्ता और होटलों के मिलते-जुलते नामों के कारण ग्राहकों के साथ धोखा हो रहा है। अगर राज्य सरकार नियम बना दें तो ये मामले कंज्यूमर फोरम में आ सकते हैं और इस पर कार्रवाई भी हो सकती है। नया बजट आ रहा है ऐसे में सरकार को चाहिए कि ऑनलाइन सर्विसेस भले ही वो फूड, शॉपिंग, टैक्सी सर्विस या कोई भी अन्य सर्विस हो, उसे कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। इस संबंध में कानून बना कर इनकी पालना सुनिश्चित की जानी चाहिए।

लियाकत अली, सदस्य, राज्य उपभोक्ता आयोग