
self-reliant women
संदीप पुरोहित
खेती में खतरनाक रसायनों से उपजी सेहत की चिंताओं के बीच मेवाड़ और वागड़ में ऑर्गेनिक फॉर्मिंग की भी बयार चल पड़ी है। पूरे सम्भाग में तकरीबन ढाई हजार किसान जैविक खेती में हाथ आजमा रहे हैं। अनाज, दालें, फल हो या सब्जी, मसाले, हर उपज का उन्हें न केवल अच्छा दाम स्थानीय बाजार में ही मिल रहा है, बल्कि बाहरी शहरों के खरीदार उन्हें अग्रिम भुगतान भी कर रहे हैं।
राज्य में कृषि व अनुसंधान से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान में करीब 4.25 लाख किसान मौजूदा समय में लाखों हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती कर रहे हैं। उदयपुर सम्भाग में सर्वाधिक ऑर्गेनिक खेती बांसवाड़ा में हो रही है। उसके बाद चित्तौडगढ़़, उदयपुर, डूंगरपुर व राजसमंद में भी किसान खेती की पुरानी विधा को बचाने और विस्तार देने में जुटे हैं। उपज मुम्बई, पुणे, इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जयपुर, दिल्ली, अहमदाबाद, सूरत तक पहुंच रही है।
--
विपणन की नहीं मुश्किल
आधुनिक तकनीक और तौर-तरीकों से कृषि उत्पादन की अंधी दौड़ के बीच उन किसानों के लिए भी तरक्की के रास्ते खुले पड़े हैं, जिन्होंने ऑर्गेनिक फॉर्मिंग की तरफ कदम बढ़ाया। किसान बताते है कि उनकी 70 प्रतिशत तक उपज स्थानीय बाजार में ही खप जाती है। उन्हें न मार्केटिंग के लिए मशक्कत करनी पड़ती है, न उधारी का रोड़ा है। कुछ एक्पोर्टर एजेंसीज बाकी 30 प्रतिशत उपज पेशगी देेकर ही खरीद लेती है।
--
रास्ता दिखा रहे यहां के किसान
बांसवाड़ा जिले के आनंदपुरी, कुशलगढ़ ब्लॉक के 210 जैविक किसानों का समूह समेकित जैविक खेती का प्रयोग करके दूसरों को भी प्रेरित कर रहा है। समूह में 1060 किसान सदस्य हैं। यहां ये चावल की खेती में पाथरिया चावल, जीरा चावल, झीनी, काली कमोद, कोलम्बो और बाजरा में कुरी, बट्टी, ह्मली तथा मक्का में दूध मोगरा, गांगड़ी जैसी विलुप्त होते पारम्परिक बीजों की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं।
--
जिलेवार ऑर्गेनिक फॉर्मिंग से जुड़े किसान
जिला -- किसान
बांसवाड़ा -- 1060
चित्तौडगढ़़ -- 600
उदयपुर -- 225
राजसमंद -- 100
डूंगरपुर -- 350
प्रतापगढ़ -- 50
--
इन जिंसों की सर्वाधिक मांग
गेहंू, सोयाबीन, सब्जियों में आलू-प्याज, मसालों में हल्दी व अदरक, फलों में संतरा, अमरूद व पपीता की सबसे ज्यादा मांग है। इसके अलावा किसान अब ऑर्गेनिक गेहूं से आटा और मूंगफली से खाद्य तेल भी प्रोसेस करके मुहैया करा रहे हैं। सम्भाग में मूंगफली का सबसे ज्यादा उत्पादन चित्तौडगढ़़ जिले में हो रहा है।
--
विशेषज्ञों ने कहा-
वर्तमान में खेती के लिए हाइब्रीड बीज का उपयोग, रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बेतहाशा उपयोग से साग-सब्जियों में स्वाद और पौष्टिकता खत्म हो गई है। इसका बुरा असर हमारी सेहत पर पड़ रहा है।
विकास परशराम मेश्राम, कार्यक्रम अधिकारी, वाग्धरा संस्थान, बांसवाड़ा
--
इस पद्धति से खेती जनजातीय क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रही है। हम बिचौलियों की शृंखला को तोड़ रहे है और किसानों को उसकी उपज का बेहतर दाम दिला रहे हैं।
पीएल पटेल, कृषि विशेषज्ञ, वाग्धरा संस्थान
--
सम्भाग में जैविक खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ रही है। परम्परागत बीजों के संरक्षण के साथ ही उनकी आजीविका भी बढ़ रही है और उपज से सेहत को भी सुरक्षा मिल रही है।
डॉ. एसके शर्मा, निदेशक अनुसंधान, एमपीयूएटी, उदयपुर
Published on:
15 Jan 2022 09:36 am

बड़ी खबरें
View Allउदयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
