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PATRIKA STING: उदयपुर में हर जगह ठगे जा रहे शहरवासी, डिब्बे के वजन के साथ तोल रहे मिठाई तो सब्जी वाले पत्थर के बाट लेकर बैठे

उदयपुर. गोष्ठी, बैठक व सेमीनार। कभी नारे लगा लिए तो कभी पोस्टर बांट दिए।

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World Consumer Day fraud with customers in udaipur

मुकेश हिंगड /उदयपुर. गोष्ठी, बैठक व सेमीनार। कभी नारे लगा लिए तो कभी पोस्टर बांट दिए। बस एक रस्म अदायगी के तौर पर विश्व उपभोक्ता दिवस मनाया जा रहा है। इस बार भी रसद अधिकारी कार्यालय प्रथम-द्वितीय में इसके लिए प्राप्त 44 हजार रुपए ठिकाने लगाने की पूरी तैयारी है, लेकिन बाजार के राजा कहे जाने वाले आम उपभोक्ता अभी भी शोषण का शिकार है। सजग उपभोक्ता-सुरक्षित उपभोक्ता व जागो ग्राहक-जागो के नारे तो हैं लेकिन ठगों पर ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। विश्व उपभोक्ता दिवस पर पत्रिका ने शहर में आमजन से जुड़ी वस्तुओं की खरीद, मोल-भाव व चयन के अधिकार को लेकर स्टिंग किया तो पग-पग पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धज्जियां उड़ती ही नजर आई।

यह मिला नजारा
लेना है तो लो, वरना...रास्ता नापो

देहलीगेट चौराहा, तीज का चौक में सब्जी बेचने वालों के पास जब सब्जी के भाव पूछ सब्जी तोलने को कहा तो वहां आधा और एक किलोग्राम के बाट तो थे लेकिन 50, 100 और 200 ग्राम के बाट पत्थर के थे, जब उनसे सवाल किया ये पत्थर से क्यों तोल रहे है तो बोले कि वजन सही है, लेना है तो लो, वरना रास्ता नापो। इसी प्रकार मुखर्जी चौक सब्जी मंडी, सविना सब्जी मंडी, हिरणमगरी सब्जी मंडी भी यही स्थिति थी।

सेल्समैन को भी नहीं मिली एक्सपायरी डेट
आयड़ पुलिया के पास स्थित एक मॉल में टीम ने जब दूध की एक थैली को देखा तो उस पर उत्पाद के पैंकिंग की तिथि तो अंकित थी लेकिन उसकी अंतिम तिथि अंकित नहीं थी। जब सेल्समैन से पूछा तो वह भी नहीं बता पाया।

सिनेमाघरों में तो गजब की लूट
सिनेमाघरों में डिब्बा बंद खाद्य सामग्री हो या खुली सामग्री अथवा पानी की बोतल, उसकी दर कई गुणा ज्यादा वसूली जाती है। विरोध करने पर सामग्री ही नहीं दी जाती और ना ही बिल दिया जाता है।

मिठाई के साथ डिब्बा भी तोल रहे

शहर में मिठाई विक्रेता मिठाई का वजन डिब्बे के साथ कर रहे हैं, प्रशासन व रसद विभाग ने कई बार आंखे दिखाई लेकिन मिठाई वालों ने अपनी आंखे फेर ली और मर्जी चला रखी है, बुधवार को जब टीम शास्त्रीसर्किल, टाउनहॉल, सूरजपोल पर मिठाई विक्रेता के वहां पहुंची तो डिब्बे के साथ ही मिठाई तोल रहे थे, देहलीगेट पर एक दुकानदार से कहा कि पहले मिठाई तोलो फिर डिब्बे में दो तो बोले कोई ज्यादा फर्क नहीं है, लेकिन आखिर वह माना नहीं और डिब्बा तोल ही गया।

पहले देते हैं लाभ देने वाली कंपनियों की वस्तु
शहर में अधिकांश दुकानों पर कई वस्तुएं विभिन्न ब्रांड की मिलती है। इनमें प्रमुख मार्गों, प्रमुख बाजारों और प्रमुख स्थलों पर ग्राहक द्वारा किसी भी वस्तु की मांग करने पर अधिकांश अधिक लाभ वाली वस्तु ही दी जाती है।

मिलती जुलती वस्तुएं

शहर में सर्वाधिक बोतल बंद पानी की कंपनियां है। इसके साथ ही नुडल्स, साबुन, तेल, सहित खाने-पीने की कई वस्तुएं बाजार में उपलब्ध है। ब्रांडेड कंपनी के समान ही रंग और पैकिंग होने से ग्राहक भ्रमित होकर इन्हें खरीद लेता है। इन पैंकिंग पर मात्र स्पेलिंग में हल्का सा परिवर्तन किया जाता है।

एमआरपी एक जैसी

शहर में बिक रही वस्तुओं में ब्रांडेड के समान ही अन्य वस्तुओं की एमआरपी भी एक जैसी ही है। कुछ दुकानदार एमआरपी से भी कम रेट लेने और क्वालिटी की वस्तु होने का हवाला देते हुए ग्राहक को ये वस्तुएं थमा देते हैं।


सर्वे में उपभोक्ता भी लापरवाह दिखा

हमने अलग-अलग स्थानों पर करीब 25 उपभोक्ताओं से बातचीत की और पूछा कि वे जो भी सामग्री खरीदते है तो उसकी एक्सपायरी डेट देखते है क्या तो 25 में से 19 उपभोक्ताओं का जवाब था कि वे तो नहीं देखते है लेकिन दवाइयों पर जरूर देखते है। उनके तर्क थे कि पैंकिंग वाले दूध, छाछ, दही, ब्रेड आदि सब ताजा होते है उसमें एक्सपायरी डेट क्या देखना है लेकिन रूपसागर क्षेत्र में एक मामला कुछ महीने पहले सामने आया कि ब्रेड अवधिपार थी, परिवार बीमार हो गया था।

बस आप शिकायत कीजिए, यह कार्रवाई हो सकती
- यदि डिब्बा बंद वस्तुओं पर अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक राशि वसूलने संबंधी शिकायत मिलने पर व्यापारी के विरूद्ध विधिक माप विज्ञान डिब्बा बंद वस्तुएं नियम 2011 के तहत कार्यवाही की जाती है।

- ग्राहकों को खाने पीने की वस्तुएं सिनेमाघर के अंदर ले जाने से रोकने संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर जिला उपभोक्ता मंचों द्वारा सिनेमाघरों के विरूद्ध कार्यवाही की जाती है।

- सिनेमाघरों में ग्राहकों को शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा खाद्य सामग्री के नियमित नमूने लिए जाते है। डिब्बा बंद वस्तुओं की बिक्री अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक मूल्य पर नहीं की जा सकती है अगर ऐसा होता है तो विधिक माप विज्ञान विभाग की जिम्मेदारी है कि वे कार्रवाई करें।


यहां कर सकते शिकायत

- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को

- विधिक माप विज्ञान विभाग

- जिला उपभोक्ता मंच के समक्ष
- जिला रसद विभाग