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अब  NO MORE MIGRAINE: आयुर्वेद से मिला माइग्रेन का स्थायी उपचार, एलोपैथी और होम्योपैथी दवाइयां तक रह चुकी हैं नाकाम 

एलोपैथी में माइग्रेन जैसी लाइलाज बीमारी का कोई उपचार नहीं होने पर आयुर्वेद विशेषज्ञों ने कुछ शोध के माध्यमों से इसका स्थायी उपचार तलाश लिया है।

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permanent treatment for migraine headache by Ayurveda udaipur

उदयपुर . एलोपैथी में माइग्रेन जैसी लाइलाज बीमारी का कोई उपचार नहीं होने पर आयुर्वेद विशेषज्ञों ने कुछ शोध के माध्यमों से इसका स्थायी उपचार तलाश लिया है। एक, दो नहीं बल्कि पांच रोगियों पर आजमाए हुए नुस्खे के चौंकाने वाले परिणामों के बाद आयुर्वेद ने इस बीमारी को जड़ से खत्म करने का दावा किया है।

राजकीय आयुर्वेद औषधालय, सोम के चिकित्सक डॉ. मुकेश कुमार कटारा ने लंबे समय तक शोध कर आयुर्वेद दवाइयों से माइग्रेन के उपचार में सफलता हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि का फायदा में 7 साल पुराने रोगी को प्राथमिक तौर पर मिल भी चुका है। चिकित्सा अधिकारी की ओर से गंजेपन को दूर करने वाले तरीकों पर भी सफलता हासिल कर ली है। इसी तरह वे सफेद बालों को पुन: काला करने वाले फार्मूले पर भी अनुसंधान कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि अनुसंधान कार्य का पहला प्रयोग वह स्वयं पर कर रहे हैं। गौरतलब है कि अन्य किसी पैथी में माइग्रेन से रोगियों को कुछ समय तक राहत मिल सकती है, लेकिन स्थायी तौर पर नहीं।

क्या है कारण
तेज मिर्च, म*****, चाय, कॉफी, अचार, खटाई सहित पित्तवद्र्धक खाद्य पदार्थों के अत्यधिक मात्रा में निरंतर सेवन से पित्तवृद्धि होती है और पित्त प्रकूपित होता है। ऐसे में रोगी के कोष्ठबद्धता (कब्ज) हो तो वातवृद्धि प्रकूपित पित्त के साथ मिलकर अर्धावभेदक या सूर्यावर्त रोग (माइग्रेन) को जन्म देता है। अर्धावभेदक की जीर्णता में रोगी को वमन के बाद तत्कालिक आराम मिलता है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं मिलता।

रोग के लक्षण

नियमित सिरदर्द माइग्रेन का मुख्य लक्षण है। लगातार दर्द से उस स्थान की मांसपेशियां एवं तंत्रिकाएं कमजोर हो जाती है। उससे रोगी में नेत्र रिफ्लेक्शन एरर, ग्लुकोमा, सुंघने एवं स्वाद की शक्ति कम हो जाती है। समस्या से शब्द उ"ाारण में भी व्यक्ति लडख़ड़ाने लगता है। रोशनी एवं तेज आवाज सहन नहीं कर पाना, याददाश्त कम होना, नींद नहीं आना, बालों का झडऩा, जी घबराना, वमन होने की शिकायतें रोगी में बढ़ जाती हैं।

जरूरी है परहेज
रोगी को माइग्रेन बढ़ाने वाले पदार्थों से बचना चाहिए। शाम को हल्का भोजन लेना चाहिए। अधिकाधिक अंकुरित अन्न का प्रयोग से कब्ज की शिकायत कम होती है। दाल-सब्जियों के तडक़े में हींग व जीरे का प्रयोग घी के साथ करना चाहिए। सिर की बाहरी दुर्बलता को दूर करने के लिए बादाम के तेल से मालिश करनी चाहिए। बदाम के तेल को दूध के साथ पीना चाहिए। अधिकाधिक समय नींद निकालनी चाहिए।


माइग्रेन की वजह

-सरवाइकल स्पॉंिडंलाइटिस
-रक्त का दबाव बढऩा
-स्कल में ट्यूमर या रक्त का थक्का जमना
-सेरिब्रोस्पाइनल फ्लुइड की सांद्रता में परिवर्तन
-पेप्टिक अल्सर के कारण
-दिमाग में तंत्रिकाओं पर चढ़ी परत से प्रोटीन का कम होना
-कब्ज, अपच व गैस बनना
-महिलाओं में मासिक धर्म में अनियमितता
-मेनोपॉज के समय हार्मोन *****ंतुलन

यह है उपचार प्रक्रिया
पित्त की अधिकता से यह रोग बढ़ता है। रोगियों की शारीरिक प्रकृति (वात-कफ-पित्त), उम्र, स्थान व समय परिस्थिति को देखते हुए चिकित्सा विशेषज्ञ ने माइग्रेन उपचार शुरू किया। रोगियों में शास्त्रीय योगों में नारिकेल लवण, अविपत्तिकरण चूर्ण, महावात विघ्वंसन रस, गोदन्ती भस्म, सुधा षटक योग, लीला विलास रस, एरण्डभ्रष्ट हरीतकी चूर्ण, शुभ्राभस्म का प्रयोग होता है। इसी तरह जड़ी *****ियों में मदार, हरड़, बहेड़ा, आंवला, कपूर काचरी, नागरमोथा, अश्वगंधा, शुण्डी, काली मिर्च, बदाम, छोटी पीपल, नागकेशर, लोध सहित अन्य जड़ी *****ियों का उपयोग होता है।

पुष्टि और प्रमाण

आयुर्वेदिक औषधियों, रसायन, घटक, द्रव्य के प्रयोग से डॉ. कटारा के परिणाम चौंकाने वाले सामने आए हैं। पूरी पुष्टि होने के बाद डॉ. कटारा के अनुसंधान की अनुशंसा की गई है।
डॉ. बाबूलाल शर्मा, जिला आयुर्वेद अधिकारी, उदयपुर