
पंचायत चुनावों में उलझ गई हमारी 'कुसुम'
उदयपुर . राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम (आरआरईसी) की कुसुम योजना के तहत किसानों की भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने को लेकर विद्युत निगम की ओर से क्षमता के अनुसार तैयारी की गई है, लेकिन फिलहाल किसान इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं। उदयपुर जिले में नहीं के बराबर सहमति पत्र दिए गए हैं। माना जा रहा है कि पंचायतीराज प्रक्रिया के चलते क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग के बिना योजना में प्रगति नहीं देखी जा रही है।
पीएम कुसुम योजना के तहत राजस्थान के वितरण निगमों के 33/11 केवी सब स्टेशनों से जुडऩे वाले किसानों की अनुपयोगी/बंजर भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए सहमति मांगी जा रही थी। इसे लेकर नवम्बर से शुरू हुई किसानों को जोडऩे की प्रक्रिया जनवरी तक भी आगे नहीं बढ़ पाई है। निगम की ओर से जिला और सब डिवीजन वार विद्युत भार क्षमता जारी की गई, लेकिन किसान सहमति पत्र देने को आगे नहीं आ रहे हैं। माना जा रहा है कि उदयपुर जिले में आदिवासी अंचल होने से किसान की ओर से दी जाने वाली 10 प्रतिशत राशि को लेकर अड़चन आ रही है।
आवेदकों के पंजीकरण के लिए मुख्य बिन्दु
राज्य के तीनों विद्युत वितरण निगमों की ओर से चिन्हित 33/11 केवी सब स्टेशनों से जुडऩे वाले 0.5 मेगावाट से 2 मेगावाट क्षमता तक के विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए इच्छुक आवेदकों से सहमति पत्र मांगे हैं। व्यक्तिगत किसान, किसानों के समूह, सहकारी समितियां,पंचायत, किसान उत्पादक संघ, जल उपभोक्ता संघ या कोई भी विकासकर्ता इसमें शामिल हो सकते हैं।
जनप्रतिनिधियों को देनी है जानकारी
सम्बधित अधिशासी अभियंता को सभी चिह्नित सब स्टेशनों पर बीते महीनों में ही तैयारी करनी थी। संबधित 33 केवी सब स्टेशन के क्षेत्र के पंच, सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ क्षेत्रवार बैठक कर योजना के बारे में जानकारी देनी है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधयों के साथ बैठकें आयोजित करनी है, लेकिन पंचायतीराज चुनाव के चलते भी असर देखा जा रहा है।
यह है कुसुम योजना
किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (कुसुम योजना) के तहत किसान अपने खेत और बंजर भूमि पर सोलर प्लांट लगवा सकते हैं। इसके लिए किसानों को सहमती देनी है। इसके तहत किसान विद्युत निगम से बिजली लेने के साथ बेच भी सकेंगे। बिजली का उपयोग सिंचाई के लिए लेना और बची हुई बिजली विद्युत वितरण निगम को बेची जा सकेगी। योजना का लाभ वे किसान उठा सकते हैं जिनके खेतों पर कृषि कनेकशन हो और उस पर 3 से 7.5 एचपी की मोटर लगी हो। योजना में केंद्र व राज्य सरकार 30-30 प्रतिशत राशि देगी। इसके अलावा इतनी ही राशि का लोन किसानों को डिस्कॉम देगा। शेर 10 प्रतिशत राशि किसानों को ही वहन करनी है, जो लगभग 4 हजार रुपए प्रति किलोवाट होगी। किसानों को यह राशि आवेदन स्वीकृत होने पर जमा करानी होगी।
एइएन को दिए निर्देश
आवेदकों से प्रपत्र क एवं आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर रसीद देनी है। व्यक्तिगत आवेदक की पहचान के लिए आधार कार्ड व राशन कार्ड की कॉपी लेना है। जमीन पर आवेदक के मालिकाना हक और उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज जैसे जमीन की जमाबंदी की कॉपी भी लेनी आवश्यक है। एक सब स्टेशन पर आवेदक उसके पार्टनर, डायरेक्टर अथवा उसके परिवार से संबधित कंपनी/व्यक्तियों की ओर से एक से अधिक आवेदन ना किया जाए।
इनका कहना है
सहमति पत्र लिए जाने हैं। योजना में खर्च का 10 प्रतिशत हिस्सा किसानों को देना है। उदयपुर जिला आदिवासी क्षेत्र है, जहां से किसान 10 प्रतिशत हिस्सा देने में भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। प्रक्रिया शुरू हुई है, अभी समय लगेगा, क्योंकि इक्का-दुक्का किसानों के आवेदन से काम नहीं चलेगा। फीडर में 80 प्रतिशत किसान जुड़ेंगे तब बेहतर होगा।
गिरीश जोशी, एसई, एवीवीएनएल उदयपुर
Published on:
30 Jan 2020 01:56 am
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