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अब भी उधारी में पढ़ेंगे गरीब बच्चे

आरटीई में 25 फीसदी प्रवेश सीटों के पुनर्भरण का पुराना पैसा सरकार ने दिया, नए के लिए फिर करना पड़ेगा इंतजार

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अब भी उधारी में पढ़ेंगे गरीब बच्चे

अब भी उधारी में पढ़ेंगे गरीब बच्चे

उदयपुर. राज्य सरकार ने 'निशुल्क शिक्षा का अधिकारÓ तो दे दिया, लेकिन तालीम दे रहे स्कूलों को समय पर पैसा देने में कंजूसी बरत रही है। ऐसे में निजी स्कूलों में गरीब वर्ग के चयनित बच्चों से दोयम दर्जे का बर्ताव सहना पड़ सकता है। सरकार ने चौथे शिक्षण सत्र की समाप्ति पर पहले दो सत्रों का पैसा जारी किया है, लेकिन दो सत्र का पैसा अब भी बाकी है। ऐसे में निजी स्कूल उधारी पर बच्चों को पढ़ाएंगे।
निजी विद्यालयों में नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम (आरटीइ) के तहत दाखिला लेने वाले लाखों बालक-बालिकाओं की पिछले कई साल से बकाया फीस के पुनर्भरण का बजट जारी किया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने 36.76 करोड़ रुपए का बजट जारी कर दिया है। यह पैसा शैक्षणिक सत्र 2017-18 एवं 2017-18 की प्रथम एवं द्वितीय शेष किस्त के लिए मिला है। इसके बाद के दोनों सत्रों का पैसा अभी भी बकाया है।

निजी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक लॉटरी से चयन के आधार पर दाखिला पाने वाले गरीब वर्ग के 25 प्रतिशत विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा दी जाती है। निजी स्कूलों को इस पैसे का सरकार अपनी ओर से तय फॉर्मूले के आधार पर भुगतान करती है, लेकिन समय पर भुगतान नहीं मिलने से उन बच्चों के साथ कई बार भेदभावपूर्ण बर्ताव होता है। गरीब माता-पिता अच्छे स्कूल में बच्चों को पढ़ाई कराने के दबाव में खुलकर कुछ बोल नहीं पाते।
- उदयपुर में छह ब्लॉक को ही मिला पैसा

सरकार की ओर से आरटीई का बजट समय पर जारी नहीं किया जा रहा है। हाल ही में जारी बजट भी स्कूलों की उधारी के मुकाबले काफी कम है। इस बजट का पूरा उपयोग करने के बाद भी काफी पैसा बकाया रह जाएगा। उदयपुर जिले के प्रारम्भिक शिक्षा विभाग को दो सत्र 2017-18 एवं 18-19 के लिए दो करोड़ रुपए दिए हैं। मावली ब्लॉक को 2016-17 के लिए 2.5 लाख, कोटड़ा ब्लॉक को 1.10 लाख, झाड़ोल को 55 हजार, गिर्वा को 1.95 हजार, भीण्डर को 75 हजार तथा बडग़ांव ब्लॉक को 80 हजार रुपए दिए हैं। बाकी ब्लॉक को पैसा मिलने का इंतजार हैं।
- बजट कम, इस सत्र का कब मिलेगा

इधर, निजी स्कूल लगातार इस मद का पैसा सरकार से देरी से मिलने को लेकर परेशान हैं। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि आठ कक्षाओं के 25 प्रतिशत बच्चे उधारी पर पढ़ रहे हैं। हालांकि उनका दावा है कि बच्चों को शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे है, लेकिन तय फॉर्मूले का न्यून पैसा भी नहीं मिल रहा है।