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मेवाड़ से कश्मीर तक ‘प्रताप धन’ की डिमाण्ड, महाराणा प्रताप कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय नहीं कर पा रहा पूर्ति

उदयपुर. मुर्गी पालन व्यवसाय के लिए मेवाड़ से तैयार की गई ‘प्रताप धन’ मुर्गी नस्ल की देशभर में जबरदस्त डिमाण्ड है

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उदयपुर

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Krishna

Oct 25, 2019

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उदयपुर. मुर्गी पालन व्यवसाय के लिए मेवाड़ से तैयार की गई ‘प्रताप धन’ मुर्गी नस्ल की देशभर में जबरदस्त डिमाण्ड है, लेकिन इसकी पूर्ति महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिविश्वविद्यालय(एमपीयूएटी) नहीं कर पा रहा है। विश्वविद्यालय ने आपूर्ति बढ़ाने के लिए अब चूजों की पैदावार पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। इस ब्रिड की खासियत यह है कि यह चिकन और अंडे उत्पादन में सबसे अव्वल है और इसे किसी तरह की बिमारी नहीं लगती। जिससे मुर्गी पालक सबसे ज्यादा इसे पसंद कर रहे हैं। एमपीयूएटी ने ही इस ब्रिड को तीन साल पहले तैयार किया था। प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों की ओर से खरीदने के ऑर्डर विश्वविद्यालय के पास खूब आ रहे हैं।

डिमांड इतनी कि पूर्ति नहीं हो पा रही

एमपीयूएटी के पशु उत्पादक विभागाध्यक्ष डॉ. लोकेश गुप्ता ने बताया कि मौजूदा समय में प्रताप धन मुर्गी की मध्यप्रदेश, गुजरात, कश्मीर से सबसे ज्यादा मांग हो रही है लेकिन इसकी पूर्ति विश्वविद्यालय नहीं कर पा रहा है। अभी सालाना डिमाण्ड सवा लाख चूजों की है, लेकिन पूर्ति ७० से ८० हजार चूजों की ही हो पा रही है। मांग बढऩे पर अब इनके उत्पादन को बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। कश्मीर से ४ लाख, राजोरी से १ लाख चूजों के ऑर्डर पड़े है।


तीन गुणों के मिश्रण से तैयार की थी नस्ल

ऑल इंडिया कोर्डिनेटर रिसर्च की ओर से पोल्ट्री शोध पर दिए गए प्रोजेक्ट पर काम करते हुए रोड आईलेण्ड रेड(आरआईआर) जो सालाना २०० अंडे देती है, कलर ब्राइलर, जो पांच माह में ढाई किलो हो जाती है और मेवाड़ी मुर्गी जिसमें बीमारी बेहद कम लगती है। इन तीनों नस्लों को मिलाकर उन्नत मूर्गी प्रताप धन तैयार की गई। नस्ल को नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्स करनाल से रजिस्टर्ड करवाया गया है। इसे तैयार करने में ३ साल का समय लगा।


आमदनी बढ़ाने वाली मुर्गी

मुर्गी पालन से गरीब आदिवासी परिवारों की आजीविका चलती है। प्रताप धन नस्ल से इन मुर्गी पालकों की आमदनी बढ़ गई है। बड़े मुर्गी पालकों ने भी अब इसी नस्ल को कारोबार का जरिया बनाया है। इसकी खासियत यह है कि यह सालाना डेढ़ सौ के ऊपर अंडे दे रही है। पांच महीने में ढाई किलो वजन होने के साथ इसे बीमारी नहीं लगती जिससे पोल्ट्री कारोबारी फायदेवाली नस्ल बोलते है


इनका कहना है....

प्रताप धन विश्वविद्यालय की ओर से तैयार की गई उन्नत मुर्गी नस्ल है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद आय बढ़ी है। अब उत्पादन बढ़ाने के साथ नए प्रोजेक्ट पर ध्यान दे रहे हैं।
डॉ. अभयकुमार मेहता, डायरेक्टर (रिसर्च) एमपीयूएटी


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