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घाट पर सतरंगी छटा, हरी गणगौर के साथ उमड़ी आस्था

भूपालशाही और केसरिया गणगौर के साथ आज रहेगी धूमउदयपुर. पारम्परिक गीतों एवं ढोल नगाडों के साथ गणगौर महोत्सव के तीसरे दिन सोमवार को महिलाएं पारम्परिक वस्त्रों में सजी-धजी गणगौरों को लेकर गणगौर घाट पहुंची। महिलाओं के साथ छोटी-छोटी बालिकाएं भी परम्परागत वेशभूषा में नजर आई। वहीं, जींस-टी-शर्ट पहने युवतियों ने भी गणगौर उत्सव में भाग […]

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जगदीश चौक और आसपास के क्षेत्रों में मेले जैसा माहौल नजर आया। स्थानीय लोगों के साथ देश-विदेश से आए पर्यटकों ने भी इस सांस्कृतिक आयोजन का भरपूर आनंद लिया।

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भूपालशाही और केसरिया गणगौर के साथ आज रहेगी धूम

उदयपुर. पारम्परिक गीतों एवं ढोल नगाडों के साथ गणगौर महोत्सव के तीसरे दिन सोमवार को महिलाएं पारम्परिक वस्त्रों में सजी-धजी गणगौरों को लेकर गणगौर घाट पहुंची। महिलाओं के साथ छोटी-छोटी बालिकाएं भी परम्परागत वेशभूषा में नजर आई। वहीं, जींस-टी-शर्ट पहने युवतियों ने भी गणगौर उत्सव में भाग लिया। इसे देखकर परम्परा व आधुनिकता दोनों का ही मेल नजर आया।

पर्व का समापन

चैत्र कृष्ण एकम् से शुरू हुआ गणगौर पूजन का मंगलवार को आखिरी दिन होगा। महिलाएं गणगौर पूजन के बाद गणगौर व कानूड़े का विसर्जन करेंगी। इससे पूर्व परम्परानुसार, पहले व दूसरे दिन लाल व गुलाबी रंग की गणगौर को पूजने के बाद तीसरा दिन हरी गणगौर निकाली। महिलाएं घरों में बैठाई गणगौर को विभिन्न परिधानों में सजाकर व सोलह शृंगार करा कर गणगौर घाट पहुंची। इसके बाद घाट पर गणगौर की प्रतिमाओं को जल कौसुंबी दी गई। इस दौरान महिलाओं ने गणगौर के पारम्परिक गीत गाए और घाट पर गणगौर के साथ घूमर नृत्य किया। महिलाओं ने पूजा अर्चना करने के बाद विसर्जन भी किया। मंगलवार को भूपालशाही गणगौर और केसरिया गणगौर का दिन होगा। महिलाएं केसरिया वस्त्रों में सजी-धजी गणगौरों को घाट पर लाएंगी व छोटी गणगौर का विसर्जन किया जाएगा। इसी के साथ ही गणगौर पर्व की धूम भी थम जाएगी।

पर्यटकों ने भी दिखाया उत्साह

इस दौरान जगदीश चौक और आसपास के क्षेत्रों में मेले जैसा माहौल नजर आया। स्थानीय लोगों के साथ देश-विदेश से आए पर्यटकों ने भी इस सांस्कृतिक आयोजन का भरपूर आनंद लिया। बाजार में रौनक रही और पारंपरिक वस्त्रों व श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर भीड़ रही।

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