
राजस्थान आवासन मंडल की इस योजना ने तोड़ी आम आदमी की कमर (पत्रिका फाइल फोटो)
Udaipur Housing Board Dispute: उदयपुर: सपनों का घर दिलाने के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपए जमा करवाने वाला राजस्थान आवासन मंडल अपनी ही योजनाओं के जाल में उलझ गया है। पानेरियों की मादड़ी क्षेत्र में वर्ष 2013 में निकाली गई स्ववित्त पोषित आवासीय योजना के आवेदक आज भी मकान मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
लॉटरी निकले 11 साल बीत चुके हैं, लेकिन योजना जमीन विवाद में उलझकर अटक गई और सैकड़ों लोगों की जमा पूंजी फंस गई। हैरानी की बात यह है कि जिस क्षेत्र में पुरानी योजना का मामला अब तक सुलझ नहीं पाया, उसी पानेरियों की मादड़ी इलाके में आवासन मंडल अब नई आवासीय योजना लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले से पैसे जमा कर चुके लोगों में आक्रोश और असमंजस की स्थिति बन गई है।
राजस्थान आवासन मंडल ने वर्ष 2013 में स्ववित्त पोषित योजना के तहत पानेरियों की मादड़ी क्षेत्र में एमआईजी सहित विभिन्न श्रेणी के फ्लैट्स के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। प्रचार के दौरान लोगों को भरोसा दिलाया गया था कि मंडल की ओर से बनाए गए फ्लैट खरीदने से उन्हें अलग से भूखंड खरीदने, निर्माण कराने और सामग्री जुटाने की झंझट से मुक्ति मिलेगी। साथ ही आधुनिक डिजाइन, बेहतर सुविधाओं और सुव्यवस्थित कॉलोनी का सपना दिखाकर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया गया।
आवासन मंडल ने 12 सितंबर 2013 को योजना की लॉटरी निकाली थी। लॉटरी में चयनित लोगों ने तय राशि भी जमा करवा दी, लेकिन एक दशक से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी मकानों का आवंटन नहीं हो सका। आवेदकों का कहना है कि वे पिछले 11 वर्षों से लगातार विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता है।
योजना में शामिल कई लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की बचत इस उम्मीद में लगा दी थी कि कुछ वर्षों में अपना घर मिल जाएगा। एक आवेदक ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड ने भरोसा दिलाया था कि तय समय में मकान मिल जाएगा। हमने अपनी बचत और कर्ज लेकर पैसा जमा किया, लेकिन 11 साल बाद भी घर नहीं मिला। अब समझ नहीं आ रहा कि न्याय कहां मिलेगा।
आवासन मंडल ने हाल में उदयपुर सहित कई शहरों में नई आवासीय योजना की घोषणा की। इनमें पानेरियों की मादड़ी में नई योजना प्रस्तावित बताई है। सवाल उठ रहे हैं कि जब पुराने आवेदकों को मकान नहीं मिले तो उसी इलाके में नई योजना कैसे शुरू की जा रही है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि योजना के समय जमीन पर कोई विवाद नहीं था। बाद में कुछ लोग कोर्ट गए। अधिकारियों के अनुसार विवादित जमीन को अलग रख योजना को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा है।
Updated on:
24 Mar 2026 11:54 am
Published on:
24 Mar 2026 11:54 am
