
Strike
चन्दन सिंह देवड़ा/उदयपुर . विधानसभा चुनावों से पहले वसुंधरा सरकार के सामने हड़ताली कर्मचारियों को शांत करना मुश्किल हो गया है। ऐसे हालात में गांव से लेकर शहर तक में हड़ताल का असर देखने को मिल रहा है।पदोन्नति सिस्टम बनाने की मांग को लेकर ग्राम सचिव 12 सितम्बर से हड़ताल पर उतरे हुए है। ऐसे में गांवों के विकास कार्य ठप्प हो गए है। सचिवों के साथ-साथ पंचायत सहायक भी मानदेय बढ़ाने, स्थाई करने, रिक्त पदों की भर्तियों को लेकर कार्य बहिष्कार कर चले गए। यहीं नहीं अटल सेवा केन्द्रों में संचालित ई-मित्र भी ठप्प कर दिए गए हैं। कनिष्ठ अभियंता पहले ही हड़ताल पर जा चुके हैं, जिससे ग्रामीण विकास से जुड़े काम पूरी तरह से अटक गए हैं। सरकारी योजना का लाभ लेने में लोगों को दिक्कत आ रही है।जनप्रतिनिधियों को आचार संहिता लगने से पहले शिलान्यास और उद्घाटन जैसे काम नहीं होने की चिंता सता रही है। क्योंकि ग्रामीण सरकार का पूरा प्रशासनिक तंत्र काम छोडकऱ विरोध प्रदर्शन कर रहा है। सरपंचों ने भी सचिवों को समर्थन दे दिया है।
नहीं हुई ग्राम सभाएं
गांधी जयंती पर पंचायतों मे विशेष ग्राम सभाएं होनी थी, लेकिन हड़ताल की भेंट चढ़ गई। ग्राम सभाएं नहीं होने से विकास से जुड़े अहम प्रस्ताव नहीं लिए जा सके। पंचायतों और अटल सेवा केन्द्रों पर ताले लटके रहे। ई-मित्र संचालक भी हड़ताल पर है, जिससे ऑनलाइन कामकाज प्रभावित रहा। लोगों को सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी और दिक्कत का समाधान नहीं हो पा रहा है।
सद्बुद्धि यज्ञ
पंचायत सहायकों ने ब्लॉक स्तर पर कार्य बहिष्कार कर धरना प्रदर्शन जारी रखा है। मंगलवार को गिर्वा ब्लॉक के पंचायत सहायकों ने सरकार को सद्बुद्धि हवन किया। पंचायत सहायक चाहते हैं कि एक समान काम का एक समान वेतन मिले। स्थाई करने के साथ रिक्त पंचायत सहायकों के पद भरे जाएं। नरेन्द्रङ्क्षसह और प्रकाश लौहार ने बताया कि मांगों पर भी सरकार हठधर्मिता बरत रही है, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी है।
आमजन बेहाल
एक पखवाड़े से चल रही हड़तालों से ग्रामीणजन परेशान हो चुका है। क्योंकि ग्राम सचिव, पंचायत सहायक, कनिष्ठ अभियंता, एएनएम, ई-मित्र संचालक और काम का बहिष्कार कर धरने प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सुनवाई अभी तक नहीं हुई है।
Updated on:
03 Oct 2018 07:48 pm
Published on:
03 Oct 2018 07:48 pm
