
Currency and Antique Exhibition Udaipur : नोट चेक करते मुद्रा संग्रहकर्ता। फोटो पत्रिका
Udaipur : पुराने नोट पर 786 का सीरियल नंबर देखते ही हर किसी को लगता है कि उनके हाथ खजाना लग गया। सोशल मीडिया पर भी 786 नंबर वाले सामान्य नोटों को हजारों-लाखों में खरीद-फरोख्त के दावे किए जाते है। इसी उम्मीद के साथ शहर के 100 फीट रोड स्थित अशोका ग्रीन उदयपुर में तीन दिवसीय मुद्रा एवं एंटीक प्रदर्शनी में भी कई लोग पुराने नोट और सिक्के लेकर पहुंचे। किसी के पास 786 वाला नोट था तो कोई वर्षों पुराना सिक्का लेकर आया। विशेषज्ञों से कीमत पता चली तो कुछ उत्साहित हुए, जबकि कुछ को निराशा हाथ लगी।
एक समय चलन में रहे 1, 2 और 5 रुपए के पुराने नोट आज नई पीढ़ी के लिए भी कौतूहल हैं। यदि ऐसे पुराने नोट अच्छी स्थिति में हों और उनमें 786, रिपीटिंग नंबर या कोई दुर्लभ सीरीज हो तो सामान्य नोट की तुलना में संग्रहकर्ता अधिक कीमत देने को तैयार हो सकते हैं। किसी नोट की कीमत दोगुनी, कई गुना या उससे भी अधिक हो सकती है, पर यह उसकी वास्तविक दुर्लभता और खरीदार की मांग पर निर्भर करता है।
पुराने सिक्कों की कीमत समय के साथ बढ़ सकती है, पर यहां भी उम्र अकेला पैमाना नहीं है। सिक्का कितना दुर्लभ है, कितनी संख्या में जारी हुआ, उसकी धातु क्या है, उसकी स्थिति कैसी है और बाजार में मांग कितनी है इन सभी आधारों पर मूल्य तय होता है। कई बार सौ वर्ष पुराना सामान्य सिक्का अपेक्षाकृत कम कीमत का होता है, जबकि कम पुराना लेकिन बेहद दुर्लभ सिक्का कहीं अधिक मूल्य पा सकता है।
मुद्रा संग्रहकर्ता भावेश पारीक के अनुसार किसी नोट के सीरियल नंबर में कहीं भी 786 अंक आ जाना अपने आप में उसे अत्यधिक मूल्यवान नहीं बनाता। नोट संग्रह करने वाले मुख्य रूप से नंबर के पैटर्न, नोट की उम्र, दुर्लभता, स्थिति, जारी होने की अवधि. हस्ताक्षर और सीरीज सहित कई बातों को देखते हैं। '786786' जैसे रिपीटिंग या आकर्षक नंबर अथवा किसी विशेष क्रम वाले नोटों में संग्रहकर्ताओं की दिलचस्पी हो सकती है।
वहीं धार्मिक-सांस्कृतिक महत्व के कारण कुछ संग्रहकर्ता 786 नंबर वाले नोट अलग से जमा करते हैं, लेकिन उनकी कीमत के लिए कोई एक निश्चित बाजार दर तय नहीं होती। इसके अलावा नए नोटों में 786 वाला सीरियल नंबर मिलने पर भी उसे पुराने दुर्लभ नोट के बराबर नहीं माना जा सकता। कारण यह है कि संग्रह की दुनिया में उम्र और दुर्लभता का बड़ा महत्व है। बड़ी संख्या में उपलब्ध नए नोट में कोई नंबर तभी विशेष आकर्षण पैदा करता है, जब उसका पूरा सीरियल पैटर्न असामान्य हो।
मुद्रा विशेषज्ञ हर्षद शाह ने बताया पुराने नोट या सिक्के मिलने पर सोशल मीडिया के दावों के आधार पर उनकी कीमत तय नहीं करनी चाहिए। नोट का पूरा सीरियल नंबर, जारी करने वाला प्राधिकरण, हस्ताक्षर, वर्ष, स्थिति और विशेषता देखनी चाहिए। सिक्के के मामले में वर्ष, टकसाल का निशान, धातु और डिजाइन महत्वपूर्ण हैं। प्रमाणित या अनुभवी मुद्रा संग्रहकर्ता से जानकारी लेने पर वास्तविक संग्रहणीय मूल्य का बेहतर अनुमान मिल सकता है।
1- नोट को मोड़ें नहीं, फ्रेश स्थिति में रखें।
2- नमी, पानी और धूप से बचाएं।
3- नोट पर पेन, स्टेपल या निशान न लगाएं।
4- सुरक्षित करेंसी स्लीव में रखें।
5- बार-बार हाथ लगाने से बचें।
6- सीरियल नंबर साफ रहना जरूरी।
7- बेहतर कंडीशन वाले पुराने नोट की कलेक्टर वैल्यू अधिक हो सकती है।
Updated on:
09 Aug 2026 03:53 pm
Published on:
09 Aug 2026 03:53 pm
