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मुकेश हिंगड़ / उदयपुर. नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष के नाम को लेकर कांग्रेस में झगड़ा सामने आया है। इस पद के लिए दो नाम खुलकर आए और दोनों ने अलग-अलग दावेदारी की है। कांग्रेस की इस रार के बाद अब पूरी निगाहे प्रदेश कांग्रेस पर है कि वे क्या फैसला करते है। असल में उदयपुर कांग्रेस के बड़े नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री डा गिरिजा व्यास व रघुवीर सिंह मीणा का घर है और दोनों के अपनों के नाम को लेकर उलझन खड़ी हो गई है। असल में पूर्व केन्द्रीय मंत्री गिरिजा व्यास गुट के पार्षदों की ओर से नेता प्रतिपक्ष के रूप में शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोपाल शर्मा की पुत्रवधु हितांशी शर्मा के नाम का सुझाव देते हुए एक पत्र अध्यक्ष शर्मा को दिया। शर्मा ने इस पत्र को अध्यक्ष के नाते प्रभारी मंत्री मा. भंवरलाल मेघवाल को सौंप दिया। बाद में जब दूसरे गुट रघुवीर सिंह मीणा के पार्षदों को पता चला तो वे भी सक्रिय हुए और तत्काल पार्षद लोकेश गौड़ के नाम नेता प्रतिपक्ष के लिए आगे किया और एक सूची तैयार कर पार्षदों के हस्ताक्षर कराए। जब स्वयं गौड़ सूची देने के लिए मंत्री के पास पहुंच रहे थे तो पता चला कि वे एयरपोर्ट निकल गए तो पीछे से गौड़ ने भी एयरपोर्ट पर जाकर मंत्री मेघवाल को पकड़ा और पार्षदों के उनके नाम वाला सहमति पत्र सौंपा।
हितांशी के नाम पर ये दौड़े
हितांशी के नाम पर पार्षदों के हस्ताक्षर करने के लिए गिरिजा गुट से पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया, पूर्व अध्यक्ष डॉ. मधुसुदन शर्मा, अरुण टांक, शंकर चंदेल व स्वयं हितांशी शर्मा पार्षदों के हस्ताक्षर कराने में लगे, उनके नाम पर 14 पार्षदों ने समर्थन किया, इसमें से दो पार्षदों के आगे हस्ताक्षर नहीं थे और सिर्फ सहमति लिखा था। अगर हितांशी के नाम पर मुहर लगती है तो वह पहली महिला नेता प्रतिपक्ष होगी।
लोकेश के लिए ये दौड़े
लोकेश गौड़ के नाम को लेकर स्वयं गौड़, पीसीसी सदस्य सुरेश श्रीमाली के बेटे पार्षद प्रशांत श्रीमाली और अन्य पार्षदों ने मोर्चा संभाला। उन्होंने 14 पार्षदों के हस्ताक्षर व उनकी सील लगाकर मंत्री को दिए। गौड़ की तरफ से तर्क है कि वे सबसे अनुभवी है और बाकी सब नए चेहरे है।
बड़ा सवाल : सूची वायरल कैसे हुई
शहर कांग्रेस की सिफारिश वाली सूची के वायरल होने को लेकर शहर कांग्रेस में चर्चा का विषय बन गया है। स्वयं अध्यक्ष, वरिष्ठ पदाधिकारी व हितांशी के बीच यह चर्चा है कि सूची मंत्री को दी है तो ये बाहर कैसे वायरल हुई है।
अध्यक्ष बोले, मुझे देते तो, दूसरा नाम भी भेजा
मेरे पास पार्षदों के हस्ताक्षर युक्त पत्र आया जिसमें हितांशी का नाम नेता प्रतिपक्ष के लिए सुझाया तो मैने अध्यक्ष के नाते उसे प्रभारी मंत्री को भिजवा दिया। दूसरा नाम भी भेजा गया, अगर दूसरा नाम भी मेरे पास आता तो मै तो दोनों नाम लिखकर भेज देता।
- गोपाल शर्मा, अध्यक्ष शहर कांग्रेस
पार्षदों से हस्ताक्षर करवा लिए, मै भी पार्षद हूं लेकिन मुझे नहीं पूछा। पता चला तो पार्षदों ने जोर दिया कि अनुभव के आधार पर आपका नाम हो, तो मैने भी अपने समर्थन वाला पत्र मंत्रीजी को दिया। वैसे मै तो संगठन जो कहता वही करता लेकिन नाम भेजने की शुरूआत की तो हमने भी नाम दिया।
- लोकेश गौड़, दावेदार नेता प्रतिपक्ष
Published on:
22 Dec 2019 11:43 am
