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VIDEO : गुरुजी नहीं आए तो फल भी नहीं चख पाए : झरनों की सराय में टीम पहुंची तो मंगवाया दूध….

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गुरुजी नहीं आए तो फल भी नहीं चख पाए : झरनों की सराय में टीम पहुंची तो मंगवाया दूध....

चंदनसिंह देवड़ा/उदयपुर . सरकारी स्कूल में बच्चों के दूध में से कमीशनखोरी में टेकरी स्कूल का प्रधानाध्यापक तो सलाखों के पीछे पहुंच गया लेकिन जिले के अन्य सरकारी स्कूलों में भी अन्नपूर्णा दुग्ध वितरण व्यवस्था भी बदहाल है, अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ चुकी है। सरकार ने बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए स्कूल में उन्हें दूध पिलाने की योजना शुरू की लेकिन इस योजना पर शिक्षकों की मनमर्जी भारी पड़ती नजर आ रही है। पत्रिका टीम ने बुधवार को जब इस योजना की जमीनी हकीकत जानने के लिए गिर्वा और कुराबड़ ब्लॉक के कुछ स्कूलों की पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

पत्रिका टीम साढ़े नौ बजे स्कूल पहुंची तो एक कमरे में पहली से पांचवीं कक्षा तक के 13 बच्चों के साथ शिक्षिका सुषमा शर्मा मिली। बच्चों से दूध के बारे में पूछा तो वे बोले अभी नहीं पिलाया है। इस स्कूल में 25 बच्चे नामांकित है जिन पर दो शिक्षक लगे हुए हैं। शिक्षिका ने बताया कि प्रधानाध्यापक देवेन्द्र प्रसाद आमेटा दूध लेकर आते हैं लेकिन आज वह स्कूल में बिजली कनेक्शन के काम से देरी से आएंगे, इसलिए दूध नहीं आया है। बाद में प्रार्थना करवाई गई और टीम की मौजूदगी देख शिक्षिका ने दो बच्चों को रेलवे लाइन पार कर डेयरी से दो किलो 550 ग्राम दूध लाने के लिए भेज दिया गया। सवा दस बजे बच्चे दूध लेकर लौटे।

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बच्चों ने रसोई का ताला खोलकर दूध रखा और हैण्डपंप से बाल्टी भरके पानी लाए। साढ़े दस बजे स्कूल पहुंची कूक कम हैल्पर पुष्पा ने दूध गर्म किया। बच्चों ने बताया मंगलवार को फल मिलता है लेकिन बीते मंगलवार को नहीं मिला। मैडम ने बताया कि सर बिछड़ी कॉन्फ्रेंस में गए थे तो फल नहीं लाए।

आज के बाद बच्चों से दूध नहीं मंगवाएंगे। दो दिन से विद्यालय संबंधी आवश्यक कार्य से ही स्कूल देरी से पहुंचा था। — देवेन्द्र प्रसाद आमेटा प्रधानाध्यापक