
तालाब का कर रहे कायाकल्प
राजस्थान में मेवाड़-मारवाड़ की सीमा पर सुथार मादड़ा तालाब की कायाकल्प करने का काम हाथ में लिया गया है। कुछ रिटायर्ड वन व अन्य अधिकारियों से लेकर ग्रामीणों ने इस मूहिम को हाथ में लिया है। नतीजा यह है कि वहां अब तालाब को संरक्षित करने से लेकर पास ही ग्रीन पॉकेट तक बनाया जाएगा। यहीं नहीं तालाब में कॉमन कॉर्प मछलियां भी छोड़ी गई है।
दक्षिण राजस्थान में जैव विविधता व पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यरत ग्रीन पीपल सोसायटी की ओर से विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष में सुथार मादड़ा तालाब पर कार्यक्रम हुआ। गांव तथा तालाब के कायाकल्प के लिए विविध गतिविधियों को आयोजित किया गया। सोसायटी के अध्यक्ष सेवानिवृत आईएफएस राहुल भटनागर ने बताया कि कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, संवर्धन को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के साथ इकोटूरिज्म को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया। इस दौरान ग्रामीणों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए आयजनक गतिविधियों से जोड़ते हुए यहां के बच्चों को शिक्षा के साथ अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सोसायटी ने आश्वस्त किया।
सोसायटी के सदस्य सचिव सेवानिवृत आरएफएस डा. सतीश शर्मा ने क्षेत्रवासियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया और क्षेत्र में जैव विविधता संतुलन के बारे में जानकारी दी। एमपीयूएटी के इंद्रजीत माथुर ने बीजों और पौधों के महत्व व उपयोग की जानकारी दी। इस अवसर पर सेवानिवृत आरएफएस सुहेल मजबूर, सेवानिवृत आरएएएस मो.यासीन पठान, इस्माइल अली दुर्वे, सेवानिवृत आरएफएस प्रताप सिंह चुंडावत, सेवानिवृत संयुक्त निदशेक पशुपालन विभाग ललित जोशी, विनय दवे, सरपंच सुरेंद्र सिंह राव, समाजसेवी भगवानलाल पालीवाल आदि उपस्थित थे।
क्षेत्र में जैव विविधता बनाए रखने के लिए सोसायटी द्वारा गोद लिए हुए सुथार मादड़ा तालाब में कॉमन कार्प मछलियां छोड़ी गई। भटनागर ने बताया कि तालाब में पूर्व में भी मत्स्य बीजों को डाला गया था, जिससे यह तालाब अब पक्षियों के साथ मगरमच्छ का भी आसरा बना हुआ है।
Published on:
07 Jun 2022 09:06 pm

