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राजस्थान से बॉर्डर पार कर गुजरात एवं मध्यप्रदेश में मजदूरी के लिए जाने वाले आदिवासियों के ल‍िए सरकार कर रही ये कवायद..

सीमावर्ती क्षेत्रों के कुछ वाहनों को दोहरे टैक्स में छूट!

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राजस्थान से बॉर्डर पार कर गुजरात एवं मध्यप्रदेश में मजदूरी के लिए जाने वाले आदिवासियों के ल‍िए सरकार कर रही ये कवायद..

मोहम्मद इलियास/ उदयपुर. पेट की खातिर राजस्थान से बॉर्डर पार कर गुजरात एवं मध्यप्रदेश में मजदूरी के लिए जाने वाले आदिवासियों को सुरक्षित परिवहन सेवा उपलब्ध करवाने के लिए सरकार कुछ वाहनों को दो राज्यों के टैक्स में छूट दे सकती है। सरकार व परिवहन के स्तर पर इसकी कवायद चल रही है। सीमा से 50-60 किलोमीटर के फासले पर स्थित गांवों के ग्रामीणों को अभी दो राज्यों के टैक्स के चलते अधिक किराए देना पड़ता है, जिससे वे ओवरलोड जीपों में जान जोखिम में डालते हैं।
सरकार की ओर से महज करीब 200 वैध वाहन इन क्षेत्रों में चल रहे हैं जबकि तीन हजार से अधिक अवैध वाहन दो राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में दौड़ रहे हैं। ऐसे में गरीब मजदूर कम किराए के चलते ओवरलोड अवैध वाहनों में सफर करते हैं। परिवहन विभाग ने पूर्व में इसका प्रस्ताव बनाकर सरकार को भिजवाया था। हाल ही परिवहन विभाग के बड़े अधिकारियों की भी बैठक में इसी पर मंथन हुआ। परिवहन विभाग के सर्वे में सामने आया कि राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश अंतरराज्जीय मार्गों पर सार्वजनिक परिवहन सेवा के रूप में संचालित अधिकतर वाहन निजी होकर अवैध रूप से संचालित है। वैध अनुज्ञापत्र प्राप्त वाहनों संख्या कम है। इन क्षेत्रों में ही निवास करने वाले जनजाति समुदाय के अल्प आय वर्ग के लोग जीपों का संचालन कर रहे हैं। ये वाहन जिन मार्गों पर चलते हैं, उनकी औसत दूरी दोनों राज्यों में 100 किमी. से कम है। यह अंतरराज्यीय सीमा एवं अनुसूचित क्षेत्र हैं।

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गरीब आदिवासियों को होती है समस्या
- गुजरात व मध्यप्रदेश राज्य से सटे उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा व प्रतापगढ़ जिले के अनुसूचित क्षेत्र से इन राज्यों की अंतरराज्यीय सीमा पर प्रतिदिन 3 हजार वाहन सवारियां ले जा रहे हैं।
- इन वाहनों में प्रतिदिन गरीब, मजदूर व स्थानीय निवासी यात्रा करते हैं।
- अधिकतर वाहन असुरक्षित, अवैध व कर चोरी कर संचालित हो रहे हैं।
- अवैध वाहनों के संचालन से सडक़ सुरक्षा के आयाम की अवहेलना हो रही है।
- कमजोर सार्वजनिक परिवहन सेवा के कारण सामाजिक एवं आर्थिक विकास की सरकारी योजनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।


योजना का खाका बनाकर सरकार को भेज दिया गया है, इस पर मंथन चल रहा है।
मन्नालाल रावत, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी

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