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गंगा को मैली होने से बचाएगा बतख जैसा रोबोट, फलासिया के मंगल कोठारी ने साथियों के साथ तैयार किया मॉडल

फलासिया पूर्णतया सौर ऊर्जा से संचालित इस रोबोट की कीमत लगभग बीस लाख रुपए है

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robot will save Ganga from being dirty, Mangal Kothari model udaipur

हंसराज सरणोत/ फलासिया. कस्बे के एक युवा वैज्ञानिक ने आइआइटी के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग में अपने साथियों के सहयोग से बतख जैसा एक रोबोट तैयार किया है, जो न सिर्फ गंगा नदी के पानी का पूरा डाटा एकत्र करेगा बल्कि पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट भी सेटेलाइट के माध्यम से कंट्रोल रूम को भेजेगा। पूर्णतया सौर ऊर्जा से संचालित इस रोबोट की कीमत लगभग बीस लाख रुपए है और केन्द्र सरकार देश के सत्रह स्थानों पर इन रोबोट को प्लांट करने का आदेश जारी कर चुकी है।


आइआइटी कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर कार्यरत फलासिया निवासी मंगल कोठारी ने प्रो. बिशाख भट्टाचार्य, प्रो. इन्द्रशेखर सेन व प्रो. केतन राजावत के साथ मिलकर बतख जैसा रोबोट तैयार किया है। मंगल कोठारी ने प्रारंभिक शिक्षा फलासिया के स्कूल में ही ली। उन्होंने इग्लैण्ड में डॉक्टरेट करने के बाद अमरीका में भी अध्ययन किया। पिछले पांच वर्षों से मंगल आइआइटी कानपुर में सेवारत हैं।

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सत्रह रोबोट ले रही सरकार: वैज्ञानिकों द्वारा विकसित एक रोबोट की कीमत करीब बीस लाख रुपए है। ये रोबोट गंगा नदी के किनारे इंडस्ट्रीयल एरिया में रखे जाएंगे। प्रथम चरण में केन्द्रीय जल संसाधन विकास मंत्रालय ने देश के 17 स्थानों पर इन्हें प्लांट करने का फैसला किया है। इस रोबोट का अस्सी प्रतिशत हिस्सा पानी में रहेगा।

पानी की गुणवत्ता का भी पता चल सकेगा
प्रो. मंगल ने बताया कि पर्यावरण परिवर्तन का नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर लगातार प्रभाव पडऩे के मद्देनजर नदी प्रणाली पर नजर रखना आवश्यक होता है। पानी की गुणवत्ता गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि करोड़ों लोगों के लिए पीने के काम में आता है। भारतीय उपमहाद्वीप में गंगा नदी समस्त नदी प्रबंधन का केन्द्र बिंदु होने से इसकी सफाई, कायाकल्प व स्वास्थ्य संबंधी स्थिति को सरकार गंभीरता से ले रही है।

वैज्ञानिक समुदाय को अपर्याप्त कुशल मानव शक्ति के लिए जल नमूना संग्रहण और विश्लेषण, समयबद्धता, एकीकृत डाटा संकलन, पानी का ऑटो नमूनाकरण करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके मद्देनजर नदी निगरानी वेधशाला स्थापना की आवश्यकता महसूस हुई जिसमें न केवल उच्च आवृत्ति वाले डाटा का उपयोग किया जाता है बल्कि आपदाओं को लेकर पूर्व चेतावनी प्रणाली भी विकसित की जाती है। इन वेधशालाओं में रियल टाइम डाटा पहुंचाने के लिए अत्याधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होने से आइआइटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने बतख जैसा रोबोट बनाया है।

ये भी है विशेषताएं

इन हाउस वेधशाला में पानी की गुणवत्ता वाले सेंसर व ऑटो सैंपलर सारिणी विकसित करेगा।
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