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आरटीई में खेल, जो बच्चे सूची में अव्वल वो प्रवेश में फेल

आरटीई से बच्चों का स्कूलों में प्रवेश कराना अभिभावकों के लिए बना चुनौती, सूची में पहले स्थान वालों को भी लगाने पड़ रहे चक्कर

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केस 1 - शबाना (परिवर्तित नाम) के बेटे सोहेल का प्रवेश प्री प्राइमरी कक्षा में कराना था। आरटीई की लिस्ट जारी हुई, उसमें बच्चे का पहले नंबर पर नाम था। जब वे अपने वार्ड के अनुसार नजदीकी निजी स्कूल में रिपोर्टिंग करने गए तो उन्होंने कुछ दिन बाद आने को कहा। बाद में वापस जाने पर वार्ड का बहाना बता कर किसी अन्य नजदीकी स्कूल में जाने काे कहकर टाल दिया। अब शबाना अन्य निजी स्कूलों के चक्कर काट रही है।

केस 2 - जाकिर हुसैन (परिवर्तित नाम) अपने बेटे का नाम आरटीई की सूची में आने के बाद संबंधित स्कूल में पहुंचे तो पहले उन्हें बताया गया कि उनके बेटे का नाम सूची में नहीं है। जबकि बेटे का नाम सूची में पहले ही स्थान पर था। इसके बाद स्कूल ने उन्हें आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र आदि दस्तावेज जमा कराने के लिए कहा। दस्तावेज जमा कराने के बाद भी बेटे को प्रवेश नहीं दिया गया और फॉर्म रिजेक्ट कर दिया।

उदयपुर . शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत राज्य के प्राइवेट स्कूलों की प्री-प्राइमरी कक्षाओं में सत्र 2022-23 में प्रवेश के लिए प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है लेकिन इसके बावजूद अभिभावकों को बच्चों के प्रवेश के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। सूची में नाम आने पर भी कई स्कूल सूची में बच्चों के नाम ना होना बता रहे हैं तो कई दस्तावेजों का अभाव बता कर और कुछ सीटें फुल होने के बहाने प्रवेश नहीं दे रहे। वहीं, कुछ इस मामले में कोर्ट का स्टे की बात से प्रवेश देने से मना कर रहे हैं।

स्कूल बना रहे बहाना, शिक्षा विभाग में आ रहीं शिकायतें

सरकार ने लॉटरी निकालकर बच्चों को स्कूल भी आवंटित कर दिए हैं। इसके बावजूद बच्चों को एडमिशन दिलाना अभिभावकों के लिए चुनौती बनी हुई है। अभिभावक जब प्रवेश के लिए संबंधित स्कूल पहुंच रहे हैं तो उन्हें कोई न कोई बहाना बनाकर टाला जा रहा है। शिक्षा विभाग के पास इस संबंध में कई शिकायतें आई हैं, जिसका समाधान किया जा रहा है। वहीं, अभिभावकों को भी सही तरीके से ऑनलाइन आवेदन व दस्तावेजों के बारे में समझाइश की जा रही है। इस संबंध में अभिभावकों का कहना है कि पहले आरटीई के तहत आवेदन के लिए मशक्कत करनी पड़ी। जैसे-तैसे बच्चे का नंबर आया तो स्कूल प्रवेश देने से मुकर रहे हैं। जबकि, आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इसके बावजूद शहर के कई निजी स्कूल एडमिशन नहीं दे रहे हैं।

निजी स्कूल इसलिए नहीं देना चाह रहे प्रवेश

सत्र 2022-23 में निजी स्कूलों में नर्सरी से एचकेजी तक बच्चों के एडमिशन शुरू किए गए हैं। लेकिन, सरकार द्वारा फीस की पुनर्भरण राशि बच्चे के कक्षा एक में आने के बाद से ही देने की बात कही गई है। निजी स्कूल इसके विरोध में हैं। इस पर निजी स्कूल संचालकों ने सरकार के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। वर्तमान में यह मामला कोर्ट में चल रहा है। जिसके कारण भी बच्चों के एडमिशन अटक रहे हैं।

इनका कहना है...

आरटीइ के तहत प्रवेश को लेकर कई समस्याएं आ रही हैं। अभिभावकों ने ज्ञापन भी दिया है। जहां अभिभावकों की कमी है, उन्हें इस बारे में बताया जा रहा है। वहीं, जहां स्कूल प्रवेश देने से मना कर रहे हैं और स्टे की बात कर रहे हैं तो उन्हें स्टे की कॉपी लाने को कहा है। जो नहीं दे पाएंगे, उन्हें बच्चों को प्रवेश देना ही होगा।

आशा मांडावत, जिला शिक्षा अधिकारी, माध्यमिक

राज्य सरकार ने आरटीई के तहत प्रवेश देने का आदेश तो दे दिया है, लेकिन सत्र ही खत्म हो रहा है, परीक्षाओं का दौर चल रहा है। ऐसे में बच्चे को प्रवेश दे दें तो उसका परिणाम पर असर पड़ेगा। वहीं, इस समय सीटें फुल हैं। साथ ही स्कूलों को करीब 3 साल तक स्वयं के खर्च पर प्रवेश देना है, राज्य सरकार पुनर्भरण पहली कक्षा में पहुंचने पर करेगी तो निजी स्कूल अपने खर्च पर प्रवेश क्यों देंगे। सरकार को इस संबंध में भी पुनर्विचार करना चाहिए।

- दिलीप सिंह यादव, वाइस प्रेसिडेंट, प्राइवेट स्कूल्स, डायरेक्टर्स एंड मैनेजमेंट एसोसिएशन


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