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उदयपुर में पर्यटकों को अब पेंटिंग और मूवी में दिखेगा सहेलियों की बाड़ी का इतिहास

कला व संस्कृति के बारे में भी मिलेगी जानकारी, एसआईईआरटी बना रहा कला दीर्घा

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saheliyon ki bari

उदयपुर . पर्यटक को अब तक सहेलियों की बाड़ी के इतिहास के बारे में जानकारी गाइड के जरिए मौखिक रूप से या किताबों से मिलती रही है मगर आगामी पर्यटन सीजन में पर्यटक को यह जानकारी मूवी व पेंटिंग के जरिए मिल पाएगी। एसआइईआरटी ने वहां विज्ञान केन्द्र में लगी अपनी विज्ञान प्रदर्शनी को स्थानांतरण कर इसकी जगह आर्ट गैलेरी की स्थापना की कवायद शुरू कर दी है।

हर्बल गार्डन होगा तैयार
भवन के पास ही मौजूद बगीचे को हर्बल गार्डन के रूप में विकसित किया जाएगा। जिमसें औषधीय पेड़-पौधे लगाए जाएंगे जिससे पर्यटकों को इनके बारे में जानकारी मिल सकेगी।


यह होगा कला दीर्घा में
कला दीर्घा के लिए विभाग ने ख्यात चित्रकारों के साथ ही प्रदेश के विभिन्न्न जिले से ललित कला से जुड़े शिक्षा शास्त्रियों व स्कूलों में पढऩे वाले अध्यापकों से पेंटिंग बनवाई हैं। इन पेंटिंग्स में रानी अपनी सहेलियों के साथ खान-पान करती, आमोद-प्रमोद करते हुए सावन के झूला झुलते, रानी अपनी सहेलियों के साथ बाड़ी में समय बिताती दर्शाई जाएंगी। इसके अलावा मोलेला की टेराकोटा कलाकृतियों में गणगौर की सवारी, श्रीनाथजी की ग्वाल झांकी, गवरी नृत्य, भीलों की बारात, भामाशाह की दानवीरता सहित अन्य झांकियां समाहित होंगी। साथ ही लघुचित्र शैली, नाथद्वारा चित्र शैली, कावड़ शैली, आधुनिक कला आदि को प्रदर्शित किया जाएगा। विज्ञान केन्द्र में आने वाले पर्यटकों को एक लघु फिल्म भी देखने को मिलेगी। इस दीर्घा में लगने वाली पेंटिंग व कला के लिए करीब ६ कार्यशालाएं हो चुकी हैं।

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एेसे बनी योजना
एसआईईआरटी की ओर से सहेलियों की बाड़ी में बरसों से विज्ञान प्रदर्शनी लगा रखी थी। कार्यशालाओं में आने वाले शैक्षिक कर्मी व छात्र प्रदर्शनी में आते रहे हैं, मगर सहेलियों की बाड़ी में पर्यटकों की आवाजाही से व्यवधान बना रहता था। इसके चलते विभाग ने अपने कला एवं संस्कृति विभाग को विज्ञान केन्द्र में स्थापित करने के साथ ही इसे पर्यटकों के लिहाज से नया लूक देने की योजना बनाई। इससे पर्यटकों को सहेलियों की बाड़ी के इतिहास एवं यहां की संस्कृति व कला के बारे में जानकारी मिल सकेगी।

सहेलियों की बाड़ी परिसर में विभाग के विज्ञान केन्द्र में प्रदर्शनी के स्थान पर अब कला एवं शिल्प दीर्घा लगाई जा रही है जिससे पर्यटकों को मूवी व पेंटिंग के जरिये सहेलियों की बाड़ी के इतिहास एवं मेवाड़ की कला एवं संस्कृति की जानकारी मिलेगी। तीन माह में तैयार हो जाएगी।
रुक्मणि रियार सिहाग, निदेशक एसआईईआरटी उदयपुर







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