
,Sea plane: देश में पहली सी-प्लेन सेवा का आरंभ, केवडिया से अहमदाबाद पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी
उदयपुर. गुजरात के केवडिय़ा में स्थित स्टेच्यू ऑफ यूनिटी, सरदार सरोवर बांध और साबरमती रीवरफ्रंट को जोडऩे के लिए देश की पहली सी-प्लेन सेवा शुरू हो गई है। इस सेवा के शुरू होने से अब देश में सी-प्लेन की संभावनाओं का विस्तार होगा। मेवाड़ की बात करें तो यहां सी-प्लेन उतरना नई बात नहीं है। ब्रिटिश काल में राजसमंद झील में डाक सेवा के लिए सी-प्लेन यहां उतारे जा चुके हैं। वहीं, उदयपुर की झीलों के अलावा जयसमंद झील में भी इसकी अच्छी संभावनाएं हैं। अगर यहां भी सी-प्लेन की सुविधा भविष्य में शुरू की जाती है तो यहां के पर्यटन की तस्वीर ही बदल जाएगी।
वर्ष 2018 में आए नितिन गडकरी ने जताई थी संभावना
दरअसल, सरकार ने उड़ान योजना के तहत क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के लिए 16 सी-प्लेन मार्गों की पहचान कराई है। इन 16 मार्गों में साबरमती और सरदार सरोवर वाला रूट भी शामिल है। यहां के बाद देश में कई जगह और भी इसके शुरू होने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। सी-प्लेन के लिए उदयपुर की झीलें फतहसागर, पिछोला, उदयसागर, बड़ी तालाब के अलावा जयसमंद और राजसमंद झील भी मुफीद हैं। वर्ष 2018 में लेकसिटी आए केंद्रीय मंत्री व भाजपा नेता नितिन गडकरी ने उदयपुर में ज्यादा झीलें होने से यहां सी प्लेन उतरने की ज्यादा संभावना बताई थी। साथ ही यहां निवेशकों को आगे आने की बात कही थी ताकि इस योजना को अमलीजामा पहनाया जा सके।
राजसमंद झील में उतरते थे सी-प्लेन
ब्रिटिश शासनकाल में ऐतिहासिक राजसमंद झील में सी-प्लेन उतरा करते थे। दरअसन, सी प्लेन का उपयोग डाक सेवा के लिए किया जाता था। यह चार सीटर प्लेन होता था जो करांची से ढाका तक के लिए संचालित होता था। सी प्लेन उतारने के लिए झील में लकड़ी के प्लेटफार्म का उपयोग होता था। गति नियंत्रण व प्लेन को रोकने के लिए लंगर भी डाला जाता था। यहां से ईंधन लेने के बाद प्लेन फिर उड़ान भरा करता था। वर्ष 1945 में उदयपुर में देशी लोक राज्य परिषद के अधिवेशन में भाग लेने आए पंडित जवाहरलाल नेहरू भी यहां सी-प्लेन से उतरे थे।
सी प्लेन की ये है खासियत
सी प्लेन खास किस्म का एयरक्राफ्ट है जो जमीन के साथ-साथ पानी से भी टेकऑफ कर सकता है। दो फुट पानी में भी लैंड कर सकता है। रेस्क्यू आपरेशन में इसका उपयोग किया जा सकता है। तीन सौ मीटर के रनवे पर भी उड़ान भर सकता है। यानी तीन सौ मीटर लंबाई वाले जल मार्ग इसके उड़ान भरने और लैंड करने के लिए उपयुक्त होगा। ऐसे में जहां ये उतरते हैं वहां वॉटर एयरोड्रम तैयार किए जाते हैं।
इनका कहना है...
देश में सी-प्लेन की शुरुआत हो चुकी है जो अच्छा कदम है। हर शहर में इसकी संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। उदयपुर में काफी झीलें हैं तो यहां भी इस पर विचार किया जा सकता है।
नंदिता भट्ट, निदेशक, उदयपुर एयरपोर्ट
सी-प्लेन के लिए पहले हाइड्रो ग्राफिक सर्वे कराया जाता है जो कि पहले सरदार सरोवर बांध में भी कराया गया। राजसमंद झील में पानी की उपलब्धता अच्छी है और लंबी भी है। अगर केंद्र व राज्य सरकार, डीजीसीए और पर्यटन मंत्रालय प्रयास करते हैं तो यहां भी अच्छी संभावनाएं हैं। यहां पहले भी सी-प्लेन उतारे जाते थे। ये हमने भी सोच रखा है लेकिन ये एक लंबी योजना है जिस पर काफी विस्तृत रूप से कार्य करने की आवश्यकता है।
सुशील कुमार, एसडीएम, राजसमंद
सी प्लेन शुरू करने का कदम पर्यटन की दृष्टि से बहुत बदलाव लाएगा। अगर उदयपुर व राजसमंद में सी प्लेन को लेकर कुछ भविष्य में योजना बनती है तो राजसमंद के साथ समन्वय से ही कार्य किया जाएगा।
शिखा सक्सेना, उपनिदेशक, पर्यटन विभाग
Published on:
02 Nov 2020 05:31 pm
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