
पूर्णिमा का व्रत करके कथा सुनें। कथा सुनने से पहले एक लोटे में जल और गिलास में गेहूं, पत्ते के दोनों में रोली और चावल रखकर कलश की वंदना करके दक्षिणा चढ़ाएं। फिर तिलक करने के बाद गेहूं के 13 दाने हाथ में लेकर कथा सुनेंए फिर गेहूं का गिलास उन्हें दे दें। लोटे के जल का रात को चंद्रमा को अघ्र्य दें।
उदयपुर . शरद पूर्णिमा अश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस साल शरद पूर्णिमा 5 अक्टूबर को मनाया जाएगा। शरद पूर्णिमा का चांद सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। इसकी चांदनी से पित्त, प्यास और दाह दूर हो जाते हैं। दशहरे से शरद पूर्णिमा तक रोज रात में 15 से 20 मिनट तक चांदनी का सेवन करना चाहिए। यह काफी फायदेमंद है।
Published on:
04 Oct 2017 08:18 pm
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