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उज्जैन. चंद्रमा की दूधिया रोशनी के साथ अमृत की बूंदें भी छलकेंगी। खीर की भीनी खुशबू से देवालय महकेंगे। शरद पूर्णिमा पर मंदिरों में पूजन-आरती के बाद भगवान को महाभोग लगाकर रात को प्रसादी वितरित की जाएगी। कई जगह हवन, गरबा तथा अन्य धार्मिक कार्यक्रमों की धूम रहेगी।
शरद पूर्णिमा (कोजागिरी पूनम) गुरुवार को मनाई जाएगी। साल में 12 पूर्णिमा होती हैं, लेकिन शरद पूर्णिमा को खास माना गया है। धर्मशास्त्र के अनुसार इस दिन चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है। ज्योतिर्विद पं. आनंदशंकर व्यास ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। वह अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण रहता है। इस रात्रि चंद्रमा का ओज सबसे तेजवान एवं ऊर्जावान होता है। साथ ही शीत ऋ तु का प्रारंभ भी होता है। पूर्णिमा की रात दूध और चावल की खीर तैयार की जाती है। चंद्रमा तत्व एवं दूध पदार्थ समान ऊर्जा वाले तत्व होने के कारण दूध चन्द्रमा की किरणों को अवशोषित कर लेता है। मान्यतानुसार उसमें अमृत वर्षा हो जाती है और खीर को खाकर अमृतपान का संस्कार पूर्ण माना जाता है।
राधा-दामोदर की मूर्ति लेकर करेंगी शिप्रा स्नान
कार्तिक मास की पूर्णिमा से एक माह तक कार्तिक स्नान का पावन दौर शुरू होगा। कार्तिक पूर्णिमा वाले दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले जागेंगी तथा राधा-दामोदर की मूर्ति साथ लेकर रामघाट पहुंचती हैं और शिप्रा के जल में स्नान कर एक माह के स्नान का क्रम शुरू करती हैं। घाट पर पूजन करके पुन: घर आती हैं और आकाशदीप लगाकर उत्सव मनाया जाता है।
लक्ष्मी और कुबेर का होता है पूजन
कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी और कुबेर का पूजन करने का विशेष महत्व है। इस रात को जागरण भी किया जाता है, जिसे कोजागरी पूनम भी कहा जाता है, अर्थात लक्ष्मी पूछती हैं, कि कौन जाग रहा है। यानी जो जागकर रात बिताता है, उस घर लक्ष्मी जाती हैं, ऐसी मान्यता है। गूलर के फूल भी इस रात में खिलते हैं, इसमें दत्तात्रेय का वास माना जाता है। इसके दर्शन का भी बड़ा महत्व है।
Published on:
04 Oct 2017 07:12 pm
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