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उदयपुर की यादों में बसें हैं शायर राहत इंदौरी, जब भी आए अपनी छाप छोड़ गए

ए वतन... इक रोज तेरी खाक में खो जाएंगे, ईमान से’, शायर राहत इंदौरी आयोजनों में आते रहे हैं उदयपुर  

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दुश्मनी दिल की पुरानी चल रही है जान से, ईमान से

लड़ते-लड़ते जिंदगी गुजरी है बेईमान से, ईमान से
ए वतन, इक रोज तेरी खाक में खो जाएंगे, सो जाएंगे, ईमान से

मर के भी रिश्ता नहीं टूटेगा हिंदुस्तान से, ईमान से’


उदयपुर. मशहूर शायर राहत इंदौरी का ये शेर आज उन्हीं की दास्तां कहता नजर आ रहा है। मंगलवार शाम को कार्डियक अरेस्ट से उनका इंतकाल हुआ। वहीं, कुछ समय पूर्व ही उनके कोरोना पॉजिटिव होने की खबर उन्होंने ही ट्वीट करके दी थी। जिस पर लोग उनके जल्द ठीक होने की दुआएं करने लगे। लेकिन, नियति को कुछ और ही मंजूर था। लेकसिटी की यादों में बसे शायर इंदौरी को शहरवासी शोक जताते हुए श्रद्धांजलि दे रहे हैं। राहत इंदौरी कई बार मुशायरों और कवि सम्मेलन के लिए उदयपुर आए थे। वे जब-जब यहां आए, उन्हें सुनने के लिए खूब भीड़ उमड़ती रही। इत्तेफाक ये भी रहा कि इसी साल मार्च में एक कार्यक्रम में वे उदयपुर आने वाले थे, लेकिन किन्हीं कारणों से कार्यक्रम रद्द हो गया।

मजहब केवल इंसानियत का हो
लोक कला मंडल हो या पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र का मंच, हर जगह उनकी आवाजें, उनके शेर गूूंूंजे हैं। हर वो रात लोगों के लिए यादगार रही, जहां वे मंच पर होते थे। लोककला मंडल न‍िदेेेेशक डॉ लईक हुसैन ने राहत इंदौरी के निधन पर दु:ख जताते हुए कहा कि उनसे कई बार कार्यक्रमों के दौरान मिलना हुआ। वे बहुत जिंदादिल और दार्शनिक इंसान थे। वे मुझे भाई की तरह मानते थे, फोन पर भी अक्सर बात होती रहती थी। उनके जेहन में इंसानियत को लेकर अलग जज्बात थे। उनका मानना था कि मजहब केवल इंसानियत का होना चाहिए। वे देशप्रेम, एकता पर बहुत बातें किया करते थे। समाज में जो चीजें मजहब को लेकर फैल रही हैं, उसे लेकर परेशान रहते थे। वे चाहते थे कि देश की गंगा-जमनी तहजीब बनी रहे।


शहरवासियों ने दी श्रद्धांजलि

नवकृति संस्थान की ओर से शायर राहत इंदौरी को श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर संस्थान के पदाधिकारियों ने कहा कि शायरी का वो आफताब जिसने अपने मुखतलिफ अन्दाज और बेबाक शायरी से समाज के हर वर्ग पर अपनी छाप छोड़ी है और आज की नई नस्ल को शायरी कहने के लिए प्रेरित किया है। उनकी शायरी हर दौर में सुनने वालों को मुतासिर करती रहेगी।

इन कार्यक्रमों में आए उदयपुर
वर्ष 2018 - ऑल इंडिया राष्ट्रीय एकता मुशायरा, महाराणा प्रताप स्मारक, मोती मगरी

वर्ष 2017 - जीवन बीमा निगम की हीरक जयंती पर जस्ट हास्यम कार्यक्रम
वर्ष 2016 - महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल में आर्ट स्कूल के उद्घाटन के अवसर पर, नगर निगम के कवि सम्मेलन में

वर्ष 2013- एक संस्था के कार्यक्रम में और इससे पूर्व भी कई बार आ चुके हैं।

युगों-युगों में जन्म लेते हैं ऐसे शायर

उर्दू अदब के बड़े शायर राहत इंदौरी का इंतकाल मुशायरों और हिंदी कवि सम्मेलन की दुनिया की बड़ी क्षति है। उदयपुर से उनका रिश्ता बहुत पुराना था और उनके चाहने वालों की एक बड़ी तादाद अक्सर पूछा करती थी कि इस बार राहत साहब को कब बुला रहे हो। वे अपने तल्ख तेवर और सरकार को निशाना बनाने वाली शायरी की वजह से भी हमेशा कई राजनेताओं और संगठनों की आंख की किरकिरी बने रहे। ये कमोबेश वही फक्कड़पन था, जिसका विरोध कबीर और तुलसी ने भी अपने युग में भुगता। उदयपुर में गत 14 मार्च को एक कवि सम्मेलन में भी राहत साहब को आमन्त्रित किया गया था, लेकिन कुछ विरोध हुआ और कोरोना संकट के चलते आयोजन को अनुमति नहीं मिल पाई। राहत इंदौरी जैसे शायर युगों-युगों में कभी जन्म लेते हैं। वे अपनी शायरी से हमेशा हमारे बीच जिंदा रहेंगे।
कवि अजातशत्रु, उदयपुर