
गया श्राद्ध के बाद तर्पण करें या नहीं
आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को सर्व पितृ अमावस्या या महालया कहते हैं। जो व्यक्ति पितृ पक्ष के पन्द्रह दिनों में श्राद्ध-तर्पण आदि कर्म किसी कारण नहीं करते या श्राद्ध तिथि याद नहीं है, वे अपने पितरों के लिए श्राद्ध आदि कर्म सर्व पितृ अमावस्या को कर सकते हैं। इस दिन कोई भी अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण, दान आदि कर सकता है। इसलिए इसे सर्व पितृ अमावस्या कहते हैं। पितृ पक्ष की अमावस्या के दिन सभी पितरों का विसर्जन होता है, इसलिए इसे पितृ विसर्जनी अमावस्या भी कहते हैं।
पिंडदान के साथ जरूरतमंदों को दान का भी है महत्व
पं. जगदीश दिवाकर के अनुसार सर्व पितृ अमावस्या के दिन गंगा आदि तीर्थ, जलाशयों पर पिंडदान का अधिक महत्व रहता है। इस दिन दूध, पके हुए चावल और तिल को मिलाकर गोल आकार के पिंड बनाए जाते हैं। इसके अलावा मान्यता है कि सर्व पितृ अमावस्या के दिन जरूरतमंदों अथवा ब्राह्मणों को भोजन कराने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। पितरों के तर्पण के बाद पितृ अमावस्या पर गाय को हरा चारा या पालक खिलाने से पितरों को संतुष्टि प्राप्त होती है। पं. जितेंद्र त्रिवेदी के अनुसार, तर्पण का अर्थ है पितरों को जल पिलाना और पिंडदान का अर्थ है उनको भोजन करवाना। सर्व पितृ अमावस्या के दिन किया गया श्राद्ध अगर अन्य दिनों में किसी पितृ के निमित्त श्राद्ध नहीं हुआ है तो इस दिन मान्य होता है, जिससे पितरों को तृप्ति प्राप्त होती है। साथ ही मान्यता के अनुसार अपने लोक वापस जाते समय वे अपने पुत्र, पौत्रों पर आशीर्वाद रूपी अमृत वर्षा करते हैं। इस अमावस्या को ही श्राद्ध पक्ष पूर्ण हो जाते हैं।
Published on:
11 Oct 2023 10:48 pm
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