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 उदयपुर श्रमजीवी कॉलेज की जमीन पर हो रही व्यावसायिक गतिविधियां, नजराने में मुफ्त में मिली जमीन पर लगी थी ये शर्त

प्रशासन ने शहर के बीच श्रमजीवी कॉलेज को दी गई भूमि पर आवंटन शर्तों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों की रोकथाम एवं इसे कब्जे में लेने की कार्रवाई नहीं.

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Shramjeevi College land case Udaipur

उदयपुर . हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 में सिंघवी बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान मामले में फैसला दिया था कि शैक्षणिक संस्था के संचालन के अलावा सम्पत्ति का व्यावसायिक प्रयोजन से कोई भी अंतरण वैध नहीं हो सकता है। इसके बावजूद प्रशासन ने शहर के बीच श्रमजीवी कॉलेज को दी गई भूमि पर आवंटन शर्तों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों की रोकथाम एवं इसे कब्जे में लेने की कार्रवाई नहीं की।


देहलीगेट-सूरजपोल मार्ग पर एवं टाउन हॉल लिंक रोड पर श्रमजीवी कॉलेज की जमीन पर कई दुकानें बनी हुई हैं जिनमें व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। शैक्षणिक संस्था की जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियों से मार्ग संकड़ा हो गया है। टाउन हॉल मुख्य रोड पर श्रमजीवी के प्रवेश द्वार पर एक दुकान बनाने की शिकायत पर निगम ने गत दिनों कॉलेज व दुकानदार को नोटिस जारी कर पूछा था कि व्यावसायिक गतिविधियां कैसे कर रहे हैं।


साक्षरता के प्रसार में दी थी सात बीघा जमीन जनहित याचिका में कहा गया था कि मेवाड़ में साक्षरता का प्रसार करने व सामाजिक बुराइयों को दूर करने में अग्रणी होने से हिन्दी विद्यापीठ (राजस्थान विद्यापीठ) संस्था को 1947 में मेवाड़ के तत्कालीन कार्यवाहक प्रधानमंत्री ने सात बीघा जमीन स्व. मोतीसिंह कोठारी की बाड़ी में दी गई।

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यह जमीन नजराना व नजूत्स से मुफ्त में दी गई थी। यह शर्त लगाई गई कि इस भूमि का उपयोग उसी के लिए किया जाएगा जिसके लिए इसे भेंट किया गया है अन्यथा उपयोग करने पर भूमि पुन: राज्य में समाहित हो जाएगी और संस्था किसी भी मुआवजे की हकदार नहीं होगी।

हाईकोर्ट का आदेश, कोई अंतरण वैध नहीं
श्रमजीवी कॉलेज की जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तत्कालीन जिला प्रमुख अशोक सिंघवी ने जनहित याचिका दायर की। सिंघवी बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान मामले में हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 में दिए फैसले में कहा कि शैक्षणिक संस्था के संचालन के अलावा इस सम्पत्ति का व्यावसायिक प्रयोजन से कोई भी अंतरण वैध नहीं होगा। साथ ही आगे भी किसी भी प्रकार के अंतरण नहीं होंगे, प्रतिबंध रहेगा। मामले में हाईकोर्ट ने तत्कालीन जिला कलक्टर से संस्था की विस्तार से जांच भी कराई। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद भी उस जमीन पर आज भी व्यवसायिक गतिविधियां संचालित है।

इनका कहना है...
एक दुकान को लेकर हमने नोटिस दिया तो उसने अधिवक्ता के जरिये जवाब के लिए समय बढ़ाने की बात कही है। साथ ही उन्होंने कहा कि हमने दुकान खाली करवा दी है। हम किसी भी सूरत में नियमों के विपरीत कार्य नहीं होने देंगे। संस्था के लिए आवंटित जमीन का व्यावसायिक उपयोग होने के मामले में हम पूरी विधिक जानकारी ले रहे हैं और इस मामले में कार्रवाई करेंगे।
सिद्धार्थ सिहाग, आयुक्त नगर निगम


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