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छोटा सा बिल और तीन बार रिश्वत, अब जेल

छोटा सा बिल और तीन बार रिश्वत, अब जेल

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मोहम्मद इलियास/उदयपुर

राजस्थान राज्य पथ परिवहन डूंगरपुर में चारदीवारी के निर्माण कार्याे, बिलों व सिक्योरिटी पेटे जमा राशि की एवज में रिश्वत लेते पकड़े गए जयपुर डिपो के कनिष्ठ अभियंता को एसीबी-1 न्यायालय के पीठासीन अधिकारी मधुसूदन मिश्रा ने दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपी अभियंता भाननगर क्वीन्स रोड वैशाली नगर जयपुर निवासी महेन्द्र सिंह पुत्र बीरबल सिंह को भ्रष्टाचार की दो अलग-अलग धाराओं में एक-एक वर्ष की कैद व 10-10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी अभियंता ने यह राशि दिलीप कुमार कटारा से ली थी। मामले में चालान पेश होने पर विशिष्ट लोक अभियोजक राजेश पारीक ने आवश्यक साक्ष्य व दस्तावेज पेश किए थे।
पहले 19 हजार और फिर 16 सौ रुपए लिए

परिवादी दिलीप कुमार कटारा ने जनवरी 2013 में डूंगरपुर एसीबी के उपाधीक्षक को दी रिपोर्ट में बताया कि राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम जयपुर की अल्पावधि निविदा सूचना में अंकित डूंगरपुर आगार कार्यशाला में चारदीवारी मरम्मत कार्य की निविदा में भाग लिया। तीन हजार रुपए बतौर धरोहर राशि जमा करवा दी। जिस पर राजस्थान राज्य परिवहन निगम जयपुर ने 11 अक्टूबर 2013 को कार्यादेश दिया। जिसमें कार्य प्रारंभ करने की दिनांक 17 अक्टूबर 2012 व समाप्ति की दिनांक 16 दिसम्बर 2012 अंकित थी। इस कार्य की कुल लागत 1 लाख 23 हजार 916 रूपए आई। जिसका बिल जयपुर से पास हुआ। इस बिल को पास करने से पूर्व माह जनवरी 2013 में रोडवेज निगम जयपुर से महेन्द्रसिंह चौधरी कनिष्ठ अभियंता व सुरेश चौधरी सहायक अभियंता डूंगरपुर आए। महेन्द्र सिंह ने कार्य की एमबी भरने और बिल पास करने की एवज में 13.5 प्रतिशत कमीशन बतौर रिश्वत मांगी। परिवादी ने 16 हजार रुपए उसी समय दे दिए। जिसके बाद उन्होंने कार्य की एमबी भरी। कुछ दिन बाद महेन्द्रसिंह चौधरी कनिष्ठ अभियंता ने मुझे फोन करके बिल पास करने की एवज में ऑफिस खर्चे के नाम पर तीन हजार रुपए की रिश्वत मांगी। यह राशि भी उनके बैंक अकाउंट में डलवा दिए। इसके बाद भी मेरा बिल 1 लाख 23 हजार 916 रुपए का पास हो गया।
सिक्यूरिटी पेटे जमा राशि में भी रिश्वत
परिवादी ने बताया कि बिल में से सुरक्षा राशि 12 हजार रुपए दस प्रतिशत के हिसाब से निगम के जयपुर के द्वारा पहले ही काट दी। इस राशि का चेक देने के लिए 10 जुलाई 2013 को महेन्द्र सिंहने फोन कर बताया कि सुरक्षा राशि का चेक तैयार है लेकिन इसके खर्चे के 1600 रुपए भोगीलाल ठेकेदार को दे देना है। मैं उससे यह रुपए ले लूंगा। पहले से ही 19 हजार रुपए दे चुका था। इस पर परिवादी परेशान होकर एसीबी में परिवाद दायर किया। सत्यापन होने के बाद परिवादी ने उसके खाते में 1600 रुपए डाले। एसीबी ने दस्तावेज संलग्र कर मामला दर्ज करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया।