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स्मार्ट सिटी में पानी के लिए 58 करोड़ का प्रावधान यहां कॉलोनियों तरस रही

बातें चौबीस घंटे पानी की लेकिन कॉलोनियों में तो पाइप लाइन ही नहीं

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Drinking water problem

Drinking water problem

उदयपुर. जब उदयपुर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला तब उदयपुर वालों को आस थी कि पीने के पानी की समस्या का समाधान होगा लेकिन अभी पानी की समस्या यहां जस की तस है। पीने के पानी के लिए स्मार्ट सिटी मिशन में करीब 58 करोड़ का प्रावधान रखा गया लेकिन यहां पीने का पानी लोगों को नहीं मिल रहा है। नगर निगम व यूआईटी पूरे शहर में काम करती है, इनकी सीमाएं भले ही अलग हो लेकिन पीने के पानी के प्रबंध को लेकर कोई संयुक्त प्लान नहीं बनाया।
यूआईटी ने भले ही कॉलोनियों को अनुमोदित कर दिया लेकिन वहां पानी का प्रबंध नहीं किया है। यूआईटी में ऐसी कई कॉलोनियों की अर्जियां पड़ी है जो पीने का पानी मांग रह है। स्मार्ट सिटी के पांच वर्ष पूर्व बनाए गए प्रस्तावों में उल्लेख किया गया है कि निगम के 70 प्रतिशत हिस्से में ही नलों के द्वारा जलापूर्ति हो रही है। हालाकि स्मार्ट सिटी बजट में जलापूर्ति के लिए 58 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है किन्तु यह संपूर्ण राशि शहर के 5 प्रतिशत हिस्से(वॉल सिटी) के लिए चौबीसों घंटे जलापूर्ति के लिए खर्च करने के लिए बताई गई थी लेकिन यहां चौबीस घंटे तो अभी सपना ही होगा क्योंकि प्रतिदिन भी पूरा पानी नहीं मिल रहा है।

कॉलोनियां बना दी उसके बाद आकर पूछा तक नहीं

1. हिरणमगरी सेक्टर 9 स्थित 80 फीट रोड पर यूआईटी की आवासीय योजना है लेकिन वहां पीने के पानी की आपूर्ति की कोई व्यवस्था नहीं है।
2. सौ फीट रोड पर 2009 में मर्यादानगर को यूआईटी ने अनुमोदित कर दिया लेकिन आज तक वहां पीने के पानी का प्रबंध नहीं किया गया है। वहां लोग परेशान हो रहे है लेकिन न तो पाइप लाइन बिछाई न किसी अन्य तरह से पानी पहुंचाया है।
3. रामपुरा क्षेत्र में यूआईटी की सीमा में बड़ी संख्या में मकान बन गए है लेकिन वहां भी पीने का पानी नहीं पहुंचा सके है। वहां अन्य कई आधारभूत सुविधाएं भी नहीं मिली है।

लोग बोले सब पता है यूआईटी को
लोगों का कहना है कि यूआईटी को सब पता है लेकिन वे तो नई योजनाएं अनुमोदित करते है पुरानी की सुविधा को भूल जाते है। यूआईटी को कई बार लिखित में पानी की समस्या के लिए अवगत करा दिया गया लेकिन सुनवाई नहीं होती है।