
मोहम्मद इलियास/ उदयपुर पत्रिका. बहुचर्चित सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर प्रकरण में शनिवार को मुंबई में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में एएसपी व उज्जैन के तत्कालीन उपाधीक्षक राजेश मिश्रा के बयान हुए। उन्होंने तुलसी ? के आपराधिक रिकॉर्ड व एनकाउंटर से पूर्व उज्जैन पहुंची राजस्थान पुलिस टीम के बारे में जानकारी दी।
एएसपी मिश्रा ने बताया कि 31 दिसम्बर 2004 को उदयपुर में हमीद लाला हत्याकांड के बाद उदयपुर के एसपी दिनेश एमएन टीम के साथ सोहराबुद्दीन व तुलसी की तलाश में उज्जैन आए थे। आईपीएस एमएन के कहने पर उन्होंने सोहराब व तुलसी का आपराधिक रिकॉर्ड उन्हें उपलब्ध करवाया था। टीम में एसपी के अलावा उपाधीक्षक आलोक श्रीवास्तव, सीआई अब्दुल रहमान के अलावा दो-तीन इंस्पेक्टर व टीम थे, जिनके नाम वह नहीं जानते हैं। मुलाकात के बाद एसपी एमएन से उनके फोन पर दो-तीन बार वार्ता भी हुई।
एएसपी मिश्रा ने बयानों में बताया कि उन्हें नवम्बर 2005 में तुलसी की गिरफ्तारी की सूचना मिली थी। इसके बाद वह टीम के साथ पूछताछ के उदयपुर आए थे। तुलसी ने पूछताछ में बताया कि हमीद लाल हत्याकांड के बाद फरारी के दौरान गैंग के ही सदस्य डॉ. प्रकाश के कहने पर कोल्हापुर (महाराष्ट्र) के चनगढ़ में एक हत्या की थी।
इससे पूर्व नवरंगपुरा अहमदाबाद व देवास मध्यप्रदेश में भी फायरिंग की थी। तुलसी हाईकोर्ट अपराधी था। बयानों के दौरान मिश्रा से आरोपित पुलिस अधिकारियों के अधिवक्ता ने क्रॉस प्रश्न भी पूछे। मिश्रा ने बताया कि तुलसी उज्जैन के नीलगंगा पुलिस थाने का हिस्ट्रीशीटर था। उसका वहां पर आपराधिक रिकॉर्ड भी दर्ज है। मिश्रा ने बताया कि तुलसी उज्जैन के नीलगंगा पुलिस थाने का हिस्ट्रीशीटर था।
Published on:
22 Apr 2018 01:38 pm
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