
टीबी दवा की नहीं टूटी कड़ी, मरीजों को मिली डॉट्स खुराक
भुवनेश पंड्या
उदयपुर. कोरोना काल में अपने जिले से या अपने घर से दूसरे राज्य में रहने वाले टीबी के मरीजों को बगैर पेशेन्ट आईडी के भी एक-एक माह की डॉट्स की खुराक दी गई है। नियमानुसार कोविड-19 से पहले किसी भी व्यक्ति को बगैर आईडी के टीबी की दवा यानी डॉट्स, एमडीआर या एक्सडीआर की दवा नहीं दी जाती है, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के दौर ने इन पाबंदियों को तोड़ा और इन मरीजों को बकायदा डॉट्स सहित अन्य खुराक बिना आईडी कार्ड के भी जारी की गई। उदयपुर टीबी हॉस्पिटल से दूसरे जिले व अन्य राज्यों से के 51 टीबी रोगियों को ये दवा दी गई।
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ये डिफाल्टर्स के हाल
उदयपुर जिले में कुल 1278 मरीज ऐसे हैं, जो डॉट्स का उपचार ले रहे हैं, आमतौर पर दो प्रतिशत डिफाल्टर होते हैं। खास बात ये है कि इस बार अप्रेल से मई तक दो माह जो कोरोना में सर्वाधिक प्रभावित हुए उन दोनों महीनों में 27 मरीज डिफाल्टर हुए, यानी ये मरीज दवा लेने नहीं आए।
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अन्य जिलों के 51 मरीजों को दी दवा
अन्य जिलों व राज्यों से आए 51 मरीजों को दवा दी गई, इसमें डीआरटीबी यानी 8 रेसिस्टेंट मरीज थे, जिन्हें ड्रग रेसिस्टेंट ट्यूबरक्लॉसिस कहा जाता है, जबकि 43 डीएसटीबी श्रेणी के मरीज थे।
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ये हुए है पहले के वर्षों में डिफाल्टर
वर्ष- डिफाल्टर
2018- 151
2019- 132
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इसलिए दी गई दवा
नियमानुसार बिना आईडी कभी भी डॉट्स या अन्य टीबी की दवा नहीं दी जाती है, लेकिन कोरोना संक्रमण को लेकर सरकार के निर्देश थे कि किसी भी जिले का या राज्य को हो उसे एक माह की दवा देनी थी, जो यहां दी गई, ताकि लॉकडाउन के कारण वह डिफाल्टर नहीं हो जाए।
पीयूष सोनी, जिला क्षय अधिकारी उदयपुर
Published on:
26 Jun 2020 08:07 am
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