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कैलाशपुरी और नागदा के मंदिर, सलूम्बर का महल अब संरक्षण की श्रेणी में

नियंत्रित क्षेत्र रहेगा 100 मीटर के दायरा, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने जारी किया आदेश

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कैलाशपुरी और नागदा के मंदिर, सलूम्बर का महल अब संरक्षण की श्रेणी में

कैलाशपुरी और नागदा के मंदिर, सलूम्बर का महल अब संरक्षण की श्रेणी में

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग निदेशालय की ओर से उदयपुर के कैलाशपुरी स्थित जैन मंदिर, नागदा स्थित शिव मंदिर और सलूम्बर के हाड़ी रानी महल को संरक्षित घोषित किया गया है। यह निर्णय राजस्थान स्मारक पुरावशेष स्थान तथा प्राचीन वस्तु अधिनियम के तहत लिया गया है। यह आदेश 23 दिसम्बर को प्रकाशित अधिसूचना के आधार पर निदेशक डॉ. महेंद्र खडग़ावत ने जारी किया। इसके साथ ही प्रदेश में विभाग की ओर से संरक्षित स्मारकों की संख्या 345 हो गई है।

शिव मंदिर नागदा

बडग़ांव तहसील के नागदा गांव में स्थित प्राचीन शिव मंदिर दो चरणों में बना हुआ है। एक चरण करीब 10वीं से 12वीं शताब्दी और दूसरा चरण 14वीं से 16वीं शताब्दी का बना प्रतीत होता है। मातृकाओं को स्तंभों में कलात्मक रूप से अलंकृत किया गया है। छतों का अलंकरण भी कलात्मक है। मुख्य शिखर व गर्भगृह जीर्णशीर्ण हो चुका है। यहां स्थापित शिवलिंग व मंडप में स्थित नंदी खंडित अवस्था में है।

हाड़ीरानी महल सलूम्बर

सलूम्बर में हाड़ीरानी महल की पोल के दोनों ओर तीन मंजिला भवन में लघु कक्ष बने हुए हैं। मुख्य द्वार के प्रथम चौक के बायीं ओर मुख्य महल है। सामने ऊंचा प्लेटफॉर्म है। महल के निचले हिस्से में 30 खंभों से हॉल बना हुआ है। महल में तालाब की ओर झरोखे और कक्ष करीब 16-17वीं शताब्दी का है। कांच और आराइश का चपड़ी वाली आकर्षक चित्रकारी छतों पर कुछ अवशेष के साथ नजर आती है।

जैन मंदिर कैलाशपुरी

नाथद्वारा रोड पर कैलाशपुरी में प्राचीन जैन मंदिर स्थित है। जैन मंदिर के पीछे एक छोटा मंदिर भी है, जो इसी परिसर का हिस्सा है। मंदिर लगभग 14वीं से 16वीं शताब्दी के बने हुए हैं। वर्तमान में गर्भगृह में मूर्ति नहीं है। मुख्य मंडप में बायीं ओर एक स्तंभ पर अभिलेख व तीर्थंकरों की प्रतिमाएं खंडित अवस्था में लगी हुई है। यह मंदिर परिसर भी बडग़ांव तहसील क्षेत्र का हिस्सा है।