
जवानी में दहाड़ से दहला देने वाला उस्ताद ने कभी हार नहीं मानी
धीरेंद्र कुमार जोशी. उदयपुर. उस्ताद टी-24 की रणथंभौर अभयारण्य में करीब 40 किलोमीटर की टेरेटरी थी। उस्ताद के क्षेत्र में उसकी दहाड़ दिल दहला देती थी। आदमखोर घोषित करने के बाद उसे उदयपुर के बायोलॉजिकल पार्क लाया गया। यहां भी उस्ताद ने हार नहीं मानी। एक बड़े ऑपरेशन के साथ ही बार-बार बीमारियों को मात देकर उस्ताद फिर खड़ा हो गया। लेकिन 28 दिसंबर को आखिर काल ने उसे अपनी आगोश में ले ही लिया।
केयर टेकर रामसिंह पंवार ने बताया कि उस्ताद को जब उदयपुर लाया गया तब उसके पिंजरे के पास किसी के भी जाने पर वह गुर्राते हुए लपकता था। वह दिनभर बाड़े में घूमता था। बाड़े की सफाई और होज में पानी भरने के लिए उस समय काफी मशक्कत करके उसे होल्डिंग एरिया में ले जाया जाता था। यह क्रम करीब दो साल तक चला। इसके बाद धीरे-धीरे जब भी हम उसे पिंजरे के बाहर से घेरते तो वह समझ जाता कि उसे होल्डिंग एरिया में जाना है। ऐसे में हमें बाड़े की सफाई करने में परेशानी नहीं होती थी। धीरे-धीरे उस्ताद और केयर टेकर के बीच रिश्ता मजबूत हुआ। हम उसकी तकलीफ समझने लगे और वह हमारी बातों और इशारों को समझने लगा था। पंवार ने बताया कि जुलाई में ऑस्टियो सार्कोमा की बीमारी होने से उसके पिछले पांव में तकलीफ हुई थी। तब से वह तीन पांव पर ही चल रहा था। लेकिन नियमित रूप से भोजन करने के साथ ही बाड़े में घूमता था। बीमार होने पर उस्ताद होल्डिंग एरिया में ही रहता था। गत 23 दिसंबर को भी ऐसा ही हुआ। इस पर चिकित्सकों ने उसकी जांच की और दवाइयां दी। इसके बाद वह 25 दिसंबर को पुन: स्वस्थ्य हो गया था। कल रात को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी इसके बाद बुधवार को दोपहर उसने दम तोड़ दिया।
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अंतिम समय तक दांत और नाखून पूरे
केयर टेकर रामसिंह ने बताया कि उस्ताद पहला ऐसा वन्यजीव है। जिसकी मृत्यु के बाद भी उसके सभी दांत और नाखून पूरे थे। इतनी उम्र बीताने वाले अधिकतर जानवरों के दांत और नाखून टूट जाते हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पार्क में दो टाइगर है इसमें कुमार मंगलूर से लाए थे और विद्या को चैन्नई से लाया गया था। दोनों ही डिस्प्ले एरिया में है।
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बॉन कैंसर है ऑस्टियो सार्कोमा
उस्ताद को ऑस्टियो सार्कोमा हड्डियों में होने वाला ऐसा घाव जो कैंसर में बदल जाता है की बीमारी थी। इसे एक प्रकार का बोन कैंसर भी कहते हैं। आमतौर पर इस बीमारी में अंग को काटा जाता है। लेकिन उस्ताद की उम्र और बीमारी को देखते हुए उसे दवाइयों से आराम देने का निर्णय लिया गया था।
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17 साल का था उस्ताद टी-24
उपवन संरक्षक अजय चित्तौड़ा ने बताया कि टाइगर जंगल में 14 से 16 साल और बाड़े में 16 से 18 साल जीते हैं। उस्ताद टी-24 की उम्र करीब 17 वर्ष थी। उस्ताद को जब उदयपुर लाया गया तब उसकी उम्र करीब 10 वर्ष थी। वर्ष 2015 में उस्ताद को मेगाकोलोन की बीमारी हुई थी। ऐसे में आईवीआरआई बरैली की टीम ने उसका ऑपरेशन किया था। इसके बाद जुलाई-2022 में उसके पैर की हड्डी बढ़ने से चलने में परेशानी हो रही थी।
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कल रात से दस्त की थी शिकायत
वरिष्ठ पशु चिकित्सक हंस कुमार जैन ने बताया कि उस्ताद की तबीयत 23 दिसंबर को खराब हुई थी। इस पर ब्लड एंड सिरम सेंपल की जांच करवाई गई। इसमें न्यूट्रोफिल का बढ़ना पाया गया। तीन उपचार के बाद वह स्वस्थ्य हो गया था। मंगलवार रात को दो बार काली दस्त लगी। दोपहर 12 बजे एक दस्त और लगी। इसके बाद दोपहर 2 बजे उसकी मृत्यु हो गई।
Published on:
29 Dec 2022 08:49 pm
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