
udaipur
उदयपुर।सिंडिकेट बैंक में मिलीभगत और फर्जी लेन-देन से करीब 1000 करोड़ का घोटाला सामने आने के बाद केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को आरोपित सीए भरत बम्ब के साथ काम करने वाले विनीत जैन के पिता के प्रतिष्ठान पर छापे मारे। लक्ष्मी मार्केट स्थित पीयूष ट्रेडर्स एंड किराणा स्टोर पर की गई कार्रवाई में विभिन्न फर्मों की आठ सीलें मिलीं।
घोटाला उजागर होने के बाद सीबीआई जोधपुर की टीम ने पीयूष ट्रेडर्स एंड किराणा स्टोर पर नजर रखी। उसके बाद धानमंडी थाना पुलिस को सर्च के लिए रिपोर्ट दी। पुलिस की मौजूदगी में सीबीआई टीम ने दुकान की तलाशी ली, तो वहां पर विभिन्न फर्मों की आठ सीलें बरामद हुई। टीम में शामिल अधिकारियों का मानना है कि आरोपितों ने बैंक से फर्जी फर्मों के नाम से ऋण उठाने के लिए इन सीलों का इस्तेमाल किया। इधर, बैंक अधिकारियों ने भी जांच के दौरान कुछ खातों को सीज किया है। इनका ब्यौरा सीबीआई को उपलब्ध करवाया जाएगा।
कई दस्तावेज जुटाए
सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि विनीत ने सीए बम्ब के साथ मिलकर अधिकांश गड़बडि़यां की। सीबीआई ने दो दिन में उदयपुर व जयपुर से कई सबूत व खातों का ब्यौरा, फर्जी चेक एवं ऋण संबंधी कागजात जुटाए हंै। बैंक के अधीनस्थ कर्मचारियों से भी पूछताछ की। फर्जी तरीके से ऋण उठने पर नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया की जानकारी भी ली। मुख्य आरोपितों के अलावा डिफॉल्टर बैंक अधिकारियों की सूची भी बनाई है। सीबीआई का कहना है कि घोटाला कुछ दिनों में नहीं, बल्कि तीन-चार वर्षों में हुआ है। इसमें अधिकारियों ने मिलीभगत कर जमकर पैसा कमाया।
300 से अधिक खाते खोले
अब तक की जांच में पता चला कि आरोपितों में तीन शाखाओं में 300 से अधिक खाते खोले। इनमें फर्जी चेक, लेटर ऑफ क्रेडिट व एलआईसी पॉलिसी के जरिए करीब एक हजार करोड़ का घोटाला किया।
हर आरोपित के मामले की होगी जांच
सीबीआई ने अब तक मामले में बैंक के दिल्ली स्थित तत्कालीन महाप्रबंधक सतीश कुमार, जयपुर के तत्कालीन क्षेत्रीय उप महाप्रबंधक संजीव कुमार व एमआई रोड शाखा के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक देशराज मीणा, मालवीय नगर शाखा के तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक आदर्श मनचंदा तथा उदयपुर के तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक अवधेश तिवारी के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की है। इस मामले में उदयपुर के सीए भरत बम्ब, पीयूष जैन, विनीत जैन तथा जयपुर के शंकर खंडेलवाल को भी आरोपित बनाया गया है।
