
न्यू भूपालपुरा क्षेत्र में गंदगी का आलम
उदयपुर. शहर के दायरे में आ चुकी ग्राम पंचायतों को नगर निगम में शामिल नहीं करने का सबसे बड़ा दंश लोगों को बदहाल सफाई व्यवस्था के रूप में झेलना पड़ रहा है। हालात यह है कि इन इलाकों में सफाई बंदोबस्त चौपट हैं और अफसर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। अधिकारी विधायक तक की सुनने को तैयार नहीं। बीते दिनों उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह की सफाई के मामले में नगर निगम के आयुक्त रामप्रकाश से फोन पर जोरदार बहस हो गई। इसके बावजूद आयुक्त ने सफाई व्यवस्था के कार्यादेश पर दस्तखत नहीं किए। अब मामले में विधायक मीणा ने जिला कलक्टर को शिकायत की है।
बिगड़ी सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीण विधायक मीणा ने यूडीए अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद निगम आयुक्त को फोन किया था। उन्होंने कहा कि आपने यूडीए से सफाई करवाने का पैसा लेकर टेंडर भी कर दिया, फिर वर्कआर्डर क्यों नहीं दे रहे, जनता परेशान हो रही है ? विधायक ने बताया कि इतना कहते ही निगम आयुक्त झल्ला उठे और बोले कि मैं यूडीए का नौकर नहीं हूं।
दूसरी ओर शहर में पिछले कई दिनों से सफाई व्यवस्था पटरी से उतरने पर लोग झल्ला रहे हैं। यूडीए के जोन-3 व 4 क्षेत्र की सर्वाधिक हालत खराब है। यूडीए अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने सफाई का जिम्मा निगम को दे दिया। इसके एवज में राशि भी दे दी है। वर्कऑर्डर नहीं होने तक वे अपने स्तर पर ही एक बार अस्थायी रूप से सफाई करवा रहे हैं। एरिया बड़ा होने से अभी कई क्षेत्रों में सड़कों पर कचरा पसरा है। गौरतलब है कि शहर की सीमा का विस्तार नहीं होने से यह समस्या आ रही है। शहर के पेराफेरी के क्षेत्रों की पंचायतों में सफाई नहीं हो पा रही है। जो कि अब शहर का ही हिस्सा है। राजस्थान पत्रिका ने सीमा क्षेत्र को बढ़ाने के लिए गुरुवार को सुनिए सरकार निगम सीमा मांगें विस्तार शीर्षक से खबर भी छापी थी। खबर प्रकाशन के बाद पेराफेरी के लोगों ने पत्रिका को कॉल कर अपनी पीड़ा बताई। पत्रिका ने जब ग्रामीण विधायक से इस संबंध में बात की तो उन्होंने निगम आयुक्त पेराफेरी के क्षेत्र को निगम क्षेत्र में शामिल करने का पक्ष रखने के साथ ही निगम आयुक्त द्वारा की अभद्रता का भी खुलासा किया।
शहर में रामपुरा से लेकर आरटीओ रोड तक कई इलाके ऐसे हैं, जो यूडीए की पेराफेरी में हैं। अधिकांश पोश इलाके हैं। इन इलाकों में पिछले कई माह से सड़कों से कचरा नहीं उठ रहा। डोर-टू-डोर कचरा संग्रह करने गाड़ियां भी नहीं जा रही। सड़कों पर कचरा होने से इन क्षेत्रों में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया सहित बीमारियां फैल रही हैं। पन्द्रह दिन पहले शोभागपुरा क्षेत्र के लोगों ने तो धरना प्रदर्शन तक किया।
रामपुरा, कोडियात जंक्शन, टाइगर हिल, बडग़ांव, बेदला, नवरत्न कॉम्पलेक्स, प्लोरा कॉम्पलेक्स, न्यू नवरतन, समतानगर बेदला, चित्रकूटनगर, मीरानगर, सौभागपुरा, डीपीएस के पीछे मार्ग से आरटीओ रोड तक।
शहर से लगते पेराफेरी के क्षेत्रों में पंचायत लगने से वहां काम नहीं हो पा रहे। पंचायतों के पास बजट का अभाव है, ऐसी स्थिति में इन क्षेत्रों को निगम में शामिल करना चाहिए। इसको लेकर 2018 से आवाज उठा रहा हूं, सरकार को भी लिख चुका हूं। यह क्षेत्र निगम में शामिल होंगे तो वहां सफाई, बिजली, पानी सभी की सुविधा हो पाएगी। अभी पेराफेरी क्षेत्र होने से ही सफाई को लेकर यह लड़ाई सामने आई है।
फूलसिंह मीणा, ग्रामीण विधायक
शहर से लगती 14 पंचायत ऐसी हैं, जिन्हें नगर निगम सीमा क्षेत्र में शामिल किया जाना चाहिए। इसको लेकर सरकार को पूर्व में भी लिखा था। इस पर अभी मंथन चल रहा है। अभी यह पंचायतें यूडीए क्षेत्र में आ रही है। अधिकांश में अभी काम नहीं हो पा रहा है, इन क्षेत्रों में छोटे-मोटे काम को लेकर जनता परेशान होती है। सरकार का शीघ्र ही अवगत करवाएंगें।
ताराचंद जैन, शहर विधायक
Published on:
18 Nov 2024 06:20 pm
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